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श्री गणपति अथर्वशीर्ष | पाठ, अर्थ, लाभ और विधि श्री गणपति अथर्वशीर्ष... श्री गणपति अथर्वशीर्ष के साथ-साथ गणेश चालीसा और गणेश स्तुति का नियमित पाठ करने से भक्त को विशेष आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं। यह त्रिविध पाठ भगवान गणेश की कृपा को शीघ्र प्राप्त करने का उत्तम साधन माना गया है। नियमपूर्वक श्रद्धा से पाठ करने पर भक्त की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं तथा उसके जीवन से रोग, भय, दोष, शोक और मानसिक डर दूर हो जाते हैं। इससे मन को शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। साथ ही गणेश जी की पूजा करने से आयु, यश, बल, बुद्धि और ज्ञान में निरंतर वृद्धि होती है। जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, सुख-समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है। 卐 श्री गणपति अथर्वशीर्ष 卐 ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि। त्वमेव केवलं कर्ताऽसि। त्वमेव केवलं धर्ताऽसि। त्वमेव केवलं हर्ताऽसि। त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि। त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम्॥ ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि॥१॥ अव त्वं मां। अव वक्तारं। ...

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श्री शारदा चालीसा | आरती, कथा, पूजा विधि और लाभ श्री शारदा चालीसा... माता शारदा को विद्या, ज्ञान और बुद्धि की देवी माना जाता है। वे माँ सरस्वती का ही एक दिव्य स्वरूप हैं। मध्य प्रदेश के मैहर नगर में स्थित शारदा माता का मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह स्थान त्रिकूट पर्वत पर स्थित है, जहाँ माता स्वयं प्रकट हुई थीं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी शारदा ने असुरों का संहार कर देवताओं की रक्षा की थी। वे ब्रह्मा की पुत्री मानी जाती हैं और सृष्टि को ज्ञान, वाणी और विवेक प्रदान करती हैं। महान कवि कालिदास, तुलसीदास, वाल्मीकि, नारद मुनि जैसे अनेक विद्वानों को माता शारदा की कृपा से ही विद्या और यश की प्राप्ति हुई। जो भी श्रद्धा से माता का स्मरण करता है, उसके जीवन से अज्ञान, भ्रम और दुःख दूर हो जाते हैं। ॥ श्री शारदा चालीसा ॥ (माँ शारदा की महिमा में भक्ति-पूर्ण चालीसा) ॥ दोहा ॥ मूर्ति स्वयंभू शारदा, मैहर आन विराज । माला, पुस्तक, धारिणी, वीणा कर में साज ॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय जय शारदा महारानी, आदि शक्ति तुम जग कल्याणी । रूप चतुर्भु...

shiv-brahmand-vijay-kavach/ब्रह्माण्डविजय नामक दिव्य कवच

भगवान शिव का ब्रह्माण्डविजय कवच | सम्पूर्ण पाठ व लाभ भगवान शिव का ब्रह्माण्डविजय कवच... ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय परशुराम ने युद्ध में कार्तवीर्य अर्जुन को पराजित करने के लिए शृंगधारी संन्यासी का वेश धारण किया और उससे उसका ‘ब्रह्माण्डविजय’ नामक दिव्य कवच दान में माँग लिया। यह कवच इतना शक्तिशाली था कि उसके रहते कार्तवीर्य अर्जुन को कोई भी पराजित नहीं कर सकता था। कवच प्राप्त करने के बाद परशुराम ने मत्स्यराज अर्जुन को युद्ध में धराशायी कर दिया। इसी प्रसंग में महर्षि नारद ने भगवान नारायण से प्रश्न किया — “हे महाभाग नारायण! मत्स्यराज कार्तवीर्य अर्जुन ने जो शिवप्रदत्त कवच धारण किया था, उसका विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए, क्योंकि उसे सुनने के लिए मेरा हृदय अत्यंत कौतूहल से भरा हुआ है।” ॥ ‘ब्रह्माण्डविजय’ नामक दिव्य कवच ॥ ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ नारायण बोले— कवचं भृणु विप्रेंद्र शंकरस्य महामनः। ब्रह्माण...

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केतु चालीसा: आत्मबोध, संतुलन और सत्य का मार्ग केतु चालीसा: आत्मबोध, संतुलन और सत्य का मार्ग... केतु ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में एक रहस्यमय और आध्यात्मिक ग्रह माना गया है। यह ग्रह वैराग्य, मोक्ष, अंतर्ज्ञान, सूक्ष्म बुद्धि और पूर्व जन्म के संस्कारों का प्रतिनिधित्व करता है। श्री केतु चालीसा के नियमित पाठ से साधक को मानसिक स्पष्टता, वाणी में प्रभाव, व्यापार में विवेक और जीवन में संतुलन प्राप्त होता है। केतु को छाया ग्रह कहा गया है, परंतु इसकी कृपा मिलने पर व्यक्ति भौतिक उलझनों से ऊपर उठकर आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है। जिन जातकों की कुंडली में केतु ग्रह अशुभ या कमजोर स्थिति में होता है, उनके लिए श्री केतु चालीसा का पाठ एक प्रभावशाली और फलदायी उपाय माना गया है। श्रद्धा, विश्वास और नियमित जप से केतु देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में शांति, विवेक और आत्मिक संतुलन का विकास होता है। केतु ग्रह का आध्यात्मिक स्वरूप: केतु को सर्प के धड़ के रूप में दर्शाया गया है, जो अहंकार के त्याग और आत्मबोध का प्रतीक है। ...

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गुरु वंदना (गुरु स्तुति) के लाभ | Guru Vandana Benefits गुरु वंदना (गुरु स्तुति)... यह गुरु वंदना श्रद्धा, विश्वास और नियमित भाव से पाठ करने पर साधक के जीवन में गहरे, स्थायी और कल्याणकारी परिवर्तन लाती है। गुरु आराधना के समय इसका उच्चारण अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके पाठ से वातावरण शुद्ध होता है , नकारात्मक ऊर्जा का क्षय होता है और सकारात्मक दिव्य कंपन उत्पन्न होते हैं। गुरु वंदना के प्रभाव से साधना-स्थल पवित्र बनता है, जिससे देवताओं का आह्वान सहज रूप से होता है और गुरु कृपा का प्रवाह बढ़ता है। यह स्तुति साधक के मन को एकाग्र करती है, चित्त को स्थिर बनाती है और अहंकार, भय तथा संशय को दूर करती है। इसके प्रभाव से साधना में आने वाली बाधाएँ समाप्त होती हैं और साधना सफल होती है । नियमित पाठ से गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा विकसित होती है, जिससे जीवन में सही मार्गदर्शन, विवेक और आत्मबल की प्राप्ति होती है। यह वंदना केवल वाणी का पाठ नहीं, बल्कि गुरु-तत्त्व से जुड़ने का माध्य...

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सूर्याधिकम् — महत्व, लाभ और मकर संक्रांति पर पाठ सूर्याधिकम् — महत्व और लाभ... सूर्याधिकम् स्तोत्र का नियमित पाठ शरीर को स्वस्थ, ऊर्जावान और निरोग बनाए रखने में अत्यंत प्रभावी माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि यह स्तोत्र सौभाग्य, आत्मबल, तेज और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। इसका अनुशासित पाठ शारीरिक ऊर्जा तथा मनोबल दोनों को बढ़ाता है और रोगों के विरुद्ध रक्षा करने में सहायक होता है। मकर संक्रांति और विशेष महत्व: पुराणों में वर्णित है कि मकर संक्रांति के पावन दिन सूर्याधिकम् का पाठ करने से सात पीढ़ियों तक की रक्षा होती है। मकर संक्रांति के समय सूर्य उत्तरायण होते हैं — अर्थात् सूर्य देव उत्तर दिशा की ओर अग्रसर होते हैं — और यह काल आध्यात्मिक उन्नति, तप, साधना और पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्याधिकम् स्तोत्र का पाठ करने से साधक को विशेष कृपा, स्वास्थ्य लाभ और जीवन में स्थायी सौभाग्य प्राप्त होता है। ॥ सूर्याधिकम् ॥ Play Audio श्री गणेशाय नमः ...