गुरु वन्दना | गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः | सम्पूर्ण पाठ, महत्व एवं लाभ गुरु वन्दना | गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः | सम्पूर्ण पाठ, महत्व एवं लाभ "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥" सनातन धर्म में गुरु को ईश्वर का साक्षात् स्वरूप माना गया है। गुरु ही वह दिव्य प्रकाश हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान, विवेक और सत्य का मार्ग दिखाते हैं। भगवान तक पहुँचने का मार्ग भी गुरु की कृपा और मार्गदर्शन से ही प्रशस्त होता है। वेद, उपनिषद और पुराणों में गुरु की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है। गुरु केवल शिक्षा देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले, चरित्र निर्माण करने वाले और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाले होते हैं। गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वह चेतना हैं जो हमें अंधकार से प्रकाश, असत्य से सत्य और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाती है। इसलिए जीवन में सदैव अपने गुरु, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करें। ॥ गुरु वन्दना ...
भक्ति ज्ञान
जीवने यत् प्राप्तम् तदर्थं कृतज्ञतां धारयतु, यत् न प्राप्तम् तदर्थं धैर्यं धारयतु।