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shri-ram-stuti-sampurn-path-arth-labh/श्रीरामस्तुतिः

श्रीरामस्तुतिः | सम्पूर्ण पाठ, अर्थ, लाभ और पाठ विधि श्रीरामस्तुतिः का संस्कृत पाठ... श्रीरामस्तुतिः भगवान श्रीराम की महिमा का गान करने वाली एक पवित्र संस्कृत स्तुति है। इसमें भक्त प्रभु राम को अपने जीवन का आधार—माता, पिता, स्वामी, मित्र और सर्वस्व—मानकर उनकी शरण ग्रहण करता है। यह स्तुति भक्ति, समर्पण और राम-नाम की महिमा को प्रकट करती है। ॥ श्रीरामस्तुतिः ॥ रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे । रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥१॥ श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम । श्रीराम राम भरताग्रज राम राम । श्रीराम राम रणकर्कश राम राम । श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥२॥ श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥३॥ माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः । स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः । सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुः । नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥४॥ दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा । पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥५॥ राम रामेति र...

laghu-shiv-rudrabhishek-stotra/लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र

लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र | शिव कृपा प्राप्ति का दिव्य स्तोत्र लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र... लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र भगवान शिव की आराधना हेतु अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र रुद्राभिषेक के समय विशेष रूप से पाठ किया जाता है। इसमें भगवान शिव के विभिन्न दिव्य स्वरूपों और उनके गुणों का सुंदर वर्णन मिलता है। यह स्तोत्र भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और शिव कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है। लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र का महत्व: यह स्तोत्र भगवान शिव के रुद्र स्वरूप को प्रसन्न करने वाला है। रुद्राभिषेक के समय इसका पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है। जीवन की बाधाओं, रोगों और संकटों से मुक्ति मिलती है। साधक के पापों का क्षय होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ॥ लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र ॥ ॐ सर्वदेवायो नमः । ॐ नमो भवाय शर्वाय रुद्राय वरदाय च । पशूनां पतये नित्यं उग्राय च कपर्दिने ॥ 1 ॥ महादेव...

parvati-vallabh-ashtakam-shiv-kripa-stotra/पार्वती वल्लभ अष्टकम्

पार्वती वल्लभ अष्टकम् का महत्व और लाभ | Shiv Bhakti Stotra पार्वती वल्लभ अष्टकम् – शिव भक्ति का दिव्य स्तोत्र... पार्वती वल्लभ अष्टकम् भगवान शिव की स्तुति में रचित एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है। इस दिव्य रचना में शिवजी के अनेक स्वरूपों, गुणों, करुणा, वैराग्य और महिमा का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है। “पार्वती वल्लभ” का अर्थ है — माता पार्वती के प्रिय स्वामी, अर्थात भगवान शिव। यह स्तोत्र भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति और शिव कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है। ॥ पार्वती वल्लभ अष्टकम् ॥ नमो भूतनाथ नमो देवदेवं नमः कालकालं नमो दिव्यतेजम्। नमः कामभस्मं नमः शांतशीलं भजे पार्वतीवल्लभं नीलकंठम् ॥1॥ सदा तीर्थसिद्धं सदा भक्तरक्षं सदा शैवपूज्यं सदा शुभ्रमक्षम। सदा ध्यानयुक्तं सदा ज्ञानतत्त्वं भजे पार्वतीवल्लभं नीलकंठम् ॥2॥ श्मशाने शयानं महारण्यवासं शरीरं गजानां सदा पार्वतेशम्। पिशाचाधिनाथं पशुना पतिं च भजे पार्वतीवल्लभं नीलकंठम् ॥3॥ फणीभूषणं भुजगालंकृतांगं गले रुद्रमालं महावीरशूरम्। कट्यां व्याघ...

namah-shivaya-panchakshar-stotra-शिव पंचाक्षर स्तोत्र -सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ

शिव पंचाक्षर स्तोत्र | सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ शिव पंचाक्षर स्तोत्र (पूर्ण पाठ)... ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय शिव पंचाक्षर स्तोत्र भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पावन और प्रभावशाली स्तोत्र है। इसकी रचना आदि शंकराचार्य द्वारा की गई मानी जाती है। इस स्तोत्र का आधार मंत्र है — “नमः शिवाय” , जिसके पाँच पवित्र अक्षर न, म, शि, व, य पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का प्रतीक हैं। इन अक्षरों के माध्यम से महादेव की महिमा, करुणा और तत्त्वज्ञान का गूढ़ वर्णन मिलता है। शिव पंचाक्षर स्तोत्र नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नमः शिवाय॥ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै म काराय नमः शिवाय॥ शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शि काराय नमः शिवाय॥ वश...

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श्री गणपति अथर्वशीर्ष | पाठ, अर्थ, लाभ और विधि श्री गणपति अथर्वशीर्ष... श्री गणपति अथर्वशीर्ष के साथ-साथ गणेश चालीसा और गणेश स्तुति का नियमित पाठ करने से भक्त को विशेष आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं। यह त्रिविध पाठ भगवान गणेश की कृपा को शीघ्र प्राप्त करने का उत्तम साधन माना गया है। नियमपूर्वक श्रद्धा से पाठ करने पर भक्त की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं तथा उसके जीवन से रोग, भय, दोष, शोक और मानसिक डर दूर हो जाते हैं। इससे मन को शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। साथ ही गणेश जी की पूजा करने से आयु, यश, बल, बुद्धि और ज्ञान में निरंतर वृद्धि होती है। जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, सुख-समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है। 卐 श्री गणपति अथर्वशीर्ष 卐 ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि। त्वमेव केवलं कर्ताऽसि। त्वमेव केवलं धर्ताऽसि। त्वमेव केवलं हर्ताऽसि। त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि। त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम्॥ ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि॥१॥ अव त्वं मां। अव वक्तारं। ...

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श्री शारदा चालीसा | आरती, कथा, पूजा विधि और लाभ श्री शारदा चालीसा... माता शारदा को विद्या, ज्ञान और बुद्धि की देवी माना जाता है। वे माँ सरस्वती का ही एक दिव्य स्वरूप हैं। मध्य प्रदेश के मैहर नगर में स्थित शारदा माता का मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह स्थान त्रिकूट पर्वत पर स्थित है, जहाँ माता स्वयं प्रकट हुई थीं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी शारदा ने असुरों का संहार कर देवताओं की रक्षा की थी। वे ब्रह्मा की पुत्री मानी जाती हैं और सृष्टि को ज्ञान, वाणी और विवेक प्रदान करती हैं। महान कवि कालिदास, तुलसीदास, वाल्मीकि, नारद मुनि जैसे अनेक विद्वानों को माता शारदा की कृपा से ही विद्या और यश की प्राप्ति हुई। जो भी श्रद्धा से माता का स्मरण करता है, उसके जीवन से अज्ञान, भ्रम और दुःख दूर हो जाते हैं। ॥ श्री शारदा चालीसा ॥ (माँ शारदा की महिमा में भक्ति-पूर्ण चालीसा) ॥ दोहा ॥ मूर्ति स्वयंभू शारदा, मैहर आन विराज । माला, पुस्तक, धारिणी, वीणा कर में साज ॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय जय शारदा महारानी, आदि शक्ति तुम जग कल्याणी । रूप चतुर्भु...