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Pitar-Chalisa/श्री पितर चालीस

श्री पितर चालीसा | सम्पूर्ण पाठ, दोहा, चौपाई, पाठ विधि और PDF | Bhakti Gyan श्री पितर चालीसा... श्री पितर चालीसा का यह सम्पूर्ण हिन्दी पाठ पितरों की श्रद्धा एवं स्मरण से संबंधित भक्ति पाठ है। चालीसा चालीस चौपाइयों की स्तुति होती है, जिसका पाठ भक्त श्रद्धा और नियम के साथ करते हैं। श्री पितर चालीसा एक भक्ति गीत है जो श्री पितरों की स्तुति से संबंधित है। कई लोग इसका पाठ पितरों के श्राद्ध एवं पितृ स्मरण के अवसर पर करते हैं। पितर अथवा पितृ से आशय परिवार के दिवंगत पूर्वजों से लिया जाता है। ॥ श्री पितर चालीसा ॥ ॥दोहा॥ हे पितरेश्वर आपको, दे दियो आशीर्वाद। चरणाशीश नवा दियो, रखदो सिर पर हाथ॥ सबसे पहले गणपत, पाछे घर का देव मनावा जी। हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी॥ ॥चौपाई॥ पितरेश्वर करो मार्ग उजागर। चरण रज की मुक्ति सागर॥ परम उपकार प...

Bhagwan-Parshuram-Chalisa/श्री परशुराम चालीसा

श्री परशुराम चालीसा | Parshuram Chalisa पाठ, लाभ, विधि और PDF | Bhakti Gyan श्री परशुराम चालीसा... श्री भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। वे तप, धर्म, शौर्य और न्याय के प्रतीक हैं। श्री परशुराम जी की भक्ति और चालीसा का पाठ श्रद्धा, आत्मबल तथा धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा के लिए किया जाता है। भक्ति स्तुति का महत्व: श्री परशुराम जी को समर्पित स्तुति का पाठ भक्तिभाव, आत्मशुद्धि और धर्म के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने में सहायक माना जाता है। ॥ श्री परशुराम चालीसा ॥ श्री भगवान परशुराम — श्री परशुराम को समर्पित भक्ति स्तुति ॥दोहा॥ श्री गुरु चरण सरोज छवि, निज मन मन्दिर धारि। सुमरि गजानन शारदा, गहि आशिष त्रिपुरारि।। बुद्धिहीन जन जानिये, अवगुणों का भण्डार। बरणौं परशुराम सुयश, निज मति के अनुसार।। ॥चौपाई॥ जय प्रभु परशुराम सुख सागर, जय मुनीश गुण ज्ञान दिवाकर। भृगुकुल मुकुट बिकट रणधीरा...

Navagraha-Gayatri-Mantra-Benefits/नवग्रह गायत्री मंत्र

नवग्रह गायत्री मंत्र | सम्पूर्ण मंत्र, लाभ, जप विधि | Bhakti Gyan नवग्रह गायत्री मंत्र: जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का दिव्य स्रोत... हिंदू धर्म के नौ ग्रहों— सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु —को समर्पित पवित्र गायत्री मंत्र हैं। इन मंत्रों का नियमित जप से ग्रहों की शुभता बढ़ाने, मानसिक शांति प्राप्त करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है। इन मंत्रों के जप से नौ ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है और ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है। सूर्य गायत्री मंत्र ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥ चंद्र गायत्री मंत्र ॐ अमृताङ्गाय विद्महे कलारूपाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्॥ मंगल गायत्री मंत्र ॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नः भौमः प्रचोदयात्॥ बुध गायत्री मंत्र ॐ सौम्यरूपाय विद्महे वाणीशाय धीमहि तन्नः सौम्यः प्रचोदयात्॥ गुरु गायत्री मंत्र ॐ अङ्गिरसाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो जीवः प्रचोदय...

guru-vandana-sampoorna-path-mahatva-labh

गुरु वन्दना | गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः | सम्पूर्ण पाठ, महत्व एवं लाभ गुरु वन्दना | गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः | सम्पूर्ण पाठ, महत्व एवं लाभ "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥" सनातन धर्म में गुरु को ईश्वर का साक्षात् स्वरूप माना गया है। गुरु ही वह दिव्य प्रकाश हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान, विवेक और सत्य का मार्ग दिखाते हैं। भगवान तक पहुँचने का मार्ग भी गुरु की कृपा और मार्गदर्शन से ही प्रशस्त होता है। वेद, उपनिषद और पुराणों में गुरु की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है। गुरु केवल शिक्षा देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले, चरित्र निर्माण करने वाले और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाले होते हैं। गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वह चेतना हैं जो हमें अंधकार से प्रकाश, असत्य से सत्य और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाती है। इसलिए जीवन में सदैव अपने गुरु, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करें। ॥ गुरु वन्दना ...

Sarvadev-Gayatri-Mantra/Spiritual Mantras/सर्वदेव गायत्री मंत्र

सर्वदेव गायत्री मंत्र | सम्पूर्ण पाठ, महत्व, लाभ एवं फलश्रुति सर्वदेव गायत्री मंत्र- सम्पूर्ण पाठ, महत्व एवं लाभ... सर्वदेव गायत्री मंत्र विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित दिव्य गायत्री मंत्रों का संग्रह है। इन मंत्रों के नियमित जप से बुद्धि, ज्ञान, शांति, आध्यात्मिक उन्नति तथा ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। सनातन धर्म में गायत्री मंत्रों को अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है। ॥ सर्वदेव गायत्री मंत्र ॥ ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥ ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥ ॐ दाशरथाय विद्महे जानकीवल्लभाय धीमहि । तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥ ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे भूमिजायै धीमहि । तन्नः सीता प्रचोदयात् ॥ ॐ दाशरथाय विद्महे उर्मिलानाथाय धीमहि । तन्नो लक्ष्मणः प्रचोदयात् ॥ ॐ अञ्जनीसुताय विद्महे वायुपुत्राय...

mangalikaran-vishnu-stotram/vishnu/मङ्गलीकरण विष्णुस्तोत्रम्

मङ्गलीकरण विष्णुस्तोत्रम् | सम्पूर्ण पाठ, महत्व, लाभ एवं फलश्रुति मङ्गलीकरण विष्णुस्तोत्रम् - सम्पूर्ण पाठ... मङ्गलीकरण विष्णुस्तोत्रम् भगवान श्री विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। इस स्तोत्र का पाठ जीवन में शुभता, समृद्धि, सुख-शांति तथा सभी प्रकार के पापों और बाधाओं के नाश के लिए किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार जो भक्त प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ॥ मङ्गलीकरण विष्णुस्तोत्रम् ॥ ॥१॥ मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः । मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः मङ्गलाय तनो हरिः ॥ ॥२॥ मङ्गलं लक्ष्मणो भ्राता मङ्गलं जानकीवरः । मङ्गलं सुन्दरो रामो मङ्गलं हनुमत्प्रियः ॥ ॥३॥ मङ्गलं परमानन्दो मङ्गलं परमेश्वरः । मङ्गलं श्रीपतिः स्वामी मङ्गलं पद्मलोचनः ॥ ॥४॥ मङ्गलं करुणासिन्धुः मङ्गलं विश्वपालकः । मङ्गलं सच्चिदानन्दो मङ्गलं जगदीश्वरः ॥ ॥५॥ मङ्गलं श्रीरङ्गनाथो मङ्गलं पुरुषोत्तमः । मङ्गलं कमलाकान्तो मङ्गलं भक्तवत्सलः ॥ ॥६॥ मङ्गलं कमलानन्दो मङ्गलं कमलालयः । मङ्गलं...