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मृत्युंजय महादेव की महिमा | असितकृतं शिवस्तोत्रम्

असितकृतं शिवस्तोत्रम्...

असितकृतं शिवस्तोत्रम्

असितकृतं शिवस्तोत्रम् भगवान शिव की महिमा का एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र महर्षि असित द्वारा रचित माना जाता है और इसमें भगवान शिव के कालातीत, गुणातीत और मृत्युंजय स्वरूप का दिव्य वर्णन मिलता है।

यह स्तोत्र विशेष रूप से उन भक्तों के लिए फलदायक है जो जीवन के संकटों, भय, रोग और मृत्यु के भय से मुक्ति चाहते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करने से मन को शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

॥ असितकृतं शिवस्तोत्रम् ॥

असित उवाच
जगद्गुरो नमस्तुभ्यं शिवाय शिवदाय च।
योगीन्द्राणां च योगीन्द्र गुरुणां गुरवे नमः॥ १॥

मृत्योर्मृत्युस्वरूपेण मृत्युसंसारखण्डन।
मृत्योरीश मृत्यबीज मृत्युञ्जय नमोऽस्तु ते॥ २॥

कालस्वरूपं कलयतां कालकालेश कारण।
कालातीत कालस्य कालकाल नमोऽस्तु ते॥ ३॥

गुणातीत गुणाधार गुणबीज गुणात्मक।
गुणीश गुणिनां बीज गुणिनां गुरवे नमः॥ ४॥

ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मज्ञ ब्रह्मभावनतत्पर।
ब्रह्मबीजस्वरूपेण ब्रह्मबीज नमोऽस्तु ते॥ ५॥

इति स्तुत्वा शिवं नत्वा पुरस्तात् मुनिश्रेष्ठः।
दीनवत् साश्रुनेत्रः पुलकाङ्कितविग्रहः॥ ६॥

असितेन कृतं स्तोत्रं भक्तियुक्तः यः पठेत्।
वर्षमेकं हविष्याशी शुद्धस्य महात्मनः॥ ७॥

स लभेद् वैष्णवं पुत्रं ज्ञानिनं चिरजीविनम्।
भवेद् धनाढ्यो दुःखी च मुक्तो भवति पण्डितः॥ ८॥

अभारी लभते भार्यां सुशीलां च पतिव्रताम्।
इह लोके सुखं भुक्त्वा यात्यन्ते शिवसन्निधिम्॥ ९॥

॥ इति श्रीब्रह्मवैवर्तपुराणे असितकृतं शिवस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व:

असितकृतं शिवस्तोत्रम् में भगवान शिव को निम्न स्वरूपों में नमन किया गया है:

  • जगद्गुरु
  • मृत्युंजय
  • कालातीत
  • गुणाधार
  • ब्रह्मस्वरूप

इस स्तोत्र में शिव को “मृत्योर्मृत्यु” कहा गया है — अर्थात् जो स्वयं मृत्यु के भी स्वामी हैं। वे जन्म-मरण के बंधनों से परे, अनादि और अनंत हैं।

जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से इस स्तोत्र का पाठ करता है, वह भय, रोग और संकटों से मुक्त होकर आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है। भगवान मृत्युंजय की कृपा से जीवन में स्थिरता, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग के समक्ष दीप और धूप प्रज्वलित करें।
  3. सच्चे मन से शिव का ध्यान करें।
  4. असितकृतं शिवस्तोत्रम् का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
  5. अंत में शिवजी से अपने और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

शुभ समय:

  • ब्रह्ममुहूर्त
  • सोमवार
  • प्रदोष काल
  • महाशिवरात्रि

पूजन सामग्री:

  • शिवलिंग
  • बेलपत्र
  • धूप और दीप
  • गंगाजल
  • सफेद पुष्प

फल और लाभ:

  • मृत्यु और अकाल भय से रक्षा
  • रोगों से मुक्ति की कामना
  • मानसिक शांति और आत्मबल
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश
  • आध्यात्मिक प्रगति

महर्षि असित का परिचय:

महर्षि असित एक महान तपस्वी और शिवभक्त ऋषि थे। उन्होंने गहन तपस्या द्वारा भगवान शिव की कृपा प्राप्त की। उनकी रचना असितकृतं शिवस्तोत्रम् तप, साधना और अनुभूति का परिणाम है।

मृत्यु भय से मुक्ति का उपाय:

मनुष्य का सबसे बड़ा भय मृत्यु का भय है। असितकृतं शिवस्तोत्रम् का नियमित पाठ:

  • मानसिक शांति देता है
  • भय को दूर करता है
  • आत्मविश्वास बढ़ाता है
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता है

महा मृत्युंजय मंत्र और इस स्तोत्र में अंतर:

महा मृत्युंजय मंत्र वेदों से लिया गया है जबकि असितकृतं शिवस्तोत्रम् एक स्तुति है जिसमें भगवान शिव के स्वरूप का विस्तार से वर्णन है। दोनों का संयुक्त पाठ अत्यंत फलदायक माना गया है।

घर में संकट हो तो क्या करें?

यदि घर में रोग, आर्थिक संकट या मानसिक तनाव हो तो 11 दिन लगातार असितकृतं शिवस्तोत्रम् का पाठ करें। सोमवार को विशेष रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करें।

महाशिवरात्रि पर विशेष महत्व:

महाशिवरात्रि के दिन इस स्तोत्र का पाठ हजारों गुना फलदायक माना गया है। इस दिन किया गया जप और स्तुति विशेष पुण्य प्रदान करता है।

FAQ:

1. असितकृतं शिवस्तोत्रम् कब पढ़ना चाहिए?

प्रातःकाल या सोमवार को पढ़ना शुभ माना जाता है।

2. क्या महिलाएँ इसका पाठ कर सकती हैं?

हाँ, यह स्तोत्र सभी के लिए है।

3. कितने दिनों तक पाठ करना चाहिए?

कम से कम 11 या 21 दिन नियमित पाठ करें।

4. क्या इससे मृत्यु का भय दूर होता है?

श्रद्धा से पाठ करने पर मानसिक भय दूर होता है और आत्मबल बढ़ता है।

भगवान शिव की कृपा से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और साधक को मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होती है। हर-हर महादेव!

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