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bhakti-bhajan-Achyutam Keshavam Krishna Damodaram/अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं — भक्तिपूर्ण भजन, लिरिक्स और अर्थ अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं — एक भक्तिपूर्ण भजन... "अच्युतम् केशवं कृष्ण दामोदरम्" एक बहुत प्रसिद्ध और लोकप्रिय भक्ति भजन है, जो भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न नामों और लीलाओं की स्तुति करता है। यह भजन कृष्ण भक्ति में प्रेम, माधुर्य और आनंद का अद्भुत संचार करता है। अच्चुतम केशवं — भजन अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता हे भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता है भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता है भगवान सोते नहीं, माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कह...

Bhajan-Shri Banke Bihari Teri Aarti Gaun/श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं — मधुर भजन, बोल और महिमा वृंदावन की मधुर भक्ति — श्री बांकेबिहारी की आरती... श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं — वृंदावन के ठाकुर जी की भक्ति में लीन यह आरती भक्तों के मन को आनंद और शांति से भर देती है। बांके बिहारी जी, जो राधा-कृष्ण के संयुक्त स्वरूप माने जाते हैं, उनकी आरती गाने से जीवन में प्रेम, भक्ति और सुख-समृद्धि का संचार होता है। भजन — शब्द श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं, हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं । आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं, श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं । ॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे, प्यारी बंसी मेरो मन मोहे । देख छवि बलिहारी मैं जाऊं । ॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ चरणों से निकली गंगा प्यारी, जिसने सारी दुनिया तारी । मैं उन चरणों के दर्शन पाऊं । ॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥ दास अनाथ के नाथ आ...

Laddu Gopal Chalisa/gopala/chalisa/श्री लड्डू गोपाल चालीसा

श्री लड्डू गोपाल चालीसा श्री लड्डू गोपाल चालीसा... श्री लड्डू गोपाल" (बाल गोपाल/श्री कृष्ण) के रूप में हैं। लड्डू गोपाल चालीसा का पाठ करने से भगवान श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है तथा व्यक्ति के जीवन में यश, कीर्ति, सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य, ज्ञान और सफलता सदैव बनी रहती है। श्री लड्डू गोपाल चालीसा का नियमित पाठ किया जा सकता है। || श्री गोपाल चालीसा || ॥ दोहा ॥ श्री राधापद कमल रज, सिर धरि यमुना कूल। वरणो चालीसा सरस, सकल सुमंगल मूल॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय पूरण ब्रह्म बिहारी। दुष्ट दलन लीला अवतारी॥ जो कोई तुम्हरी लीला गावै। बिन श्रम सकल पदारथ पावै॥ श्री वसुदेव देवकी माता। प्रकट भये संग हलधर भ्राता॥ मथुरा सों प्रभु गोकुल आये। नन्द भवन में बजत बधाये॥ जो विष देन पूतना आई। सो मुक्ति दै धाम पठाई॥ तृणावर्त राक्षस संहार्यौ। पग बढ़ाय सकटासुर मार्यौ॥ खेल खेल में माटी खाई। मुख में सब जग दियो दिखाई॥ गोपिन घर घर माखन खायो। जसुमति बाल केलि सुख पायो॥ ऊखल सों निज अंग बँधाई। यमलार्जुन जड़ योनि छुड़ाई॥ बका असुर की चोंच विदारी। विकट अघासुर दियो सँहारी॥ ब्रह्मा...