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Showing posts from June, 2026

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गुरु वन्दना | गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः | सम्पूर्ण पाठ, महत्व एवं लाभ गुरु वन्दना | गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः | सम्पूर्ण पाठ, महत्व एवं लाभ "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥" सनातन धर्म में गुरु को ईश्वर का साक्षात् स्वरूप माना गया है। गुरु ही वह दिव्य प्रकाश हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान, विवेक और सत्य का मार्ग दिखाते हैं। भगवान तक पहुँचने का मार्ग भी गुरु की कृपा और मार्गदर्शन से ही प्रशस्त होता है। वेद, उपनिषद और पुराणों में गुरु की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है। गुरु केवल शिक्षा देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले, चरित्र निर्माण करने वाले और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाले होते हैं। गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वह चेतना हैं जो हमें अंधकार से प्रकाश, असत्य से सत्य और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाती है। इसलिए जीवन में सदैव अपने गुरु, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करें। ॥ गुरु वन्दना ...

Sarvadev-Gayatri-Mantra/Spiritual Mantras/सर्वदेव गायत्री मंत्र

सर्वदेव गायत्री मंत्र | सम्पूर्ण पाठ, महत्व, लाभ एवं फलश्रुति सर्वदेव गायत्री मंत्र- सम्पूर्ण पाठ, महत्व एवं लाभ... सर्वदेव गायत्री मंत्र विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित दिव्य गायत्री मंत्रों का संग्रह है। इन मंत्रों के नियमित जप से बुद्धि, ज्ञान, शांति, आध्यात्मिक उन्नति तथा ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। सनातन धर्म में गायत्री मंत्रों को अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है। ॥ सर्वदेव गायत्री मंत्र ॥ ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥ ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥ ॐ दाशरथाय विद्महे जानकीवल्लभाय धीमहि । तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥ ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे भूमिजायै धीमहि । तन्नः सीता प्रचोदयात् ॥ ॐ दाशरथाय विद्महे उर्मिलानाथाय धीमहि । तन्नो लक्ष्मणः प्रचोदयात् ॥ ॐ अञ्जनीसुताय विद्महे वायुपुत्राय...

mangalikaran-vishnu-stotram/vishnu/मङ्गलीकरण विष्णुस्तोत्रम्

मङ्गलीकरण विष्णुस्तोत्रम् | सम्पूर्ण पाठ, महत्व, लाभ एवं फलश्रुति मङ्गलीकरण विष्णुस्तोत्रम् - सम्पूर्ण पाठ... मङ्गलीकरण विष्णुस्तोत्रम् भगवान श्री विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। इस स्तोत्र का पाठ जीवन में शुभता, समृद्धि, सुख-शांति तथा सभी प्रकार के पापों और बाधाओं के नाश के लिए किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार जो भक्त प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ॥ मङ्गलीकरण विष्णुस्तोत्रम् ॥ ॥१॥ मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः । मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः मङ्गलाय तनो हरिः ॥ ॥२॥ मङ्गलं लक्ष्मणो भ्राता मङ्गलं जानकीवरः । मङ्गलं सुन्दरो रामो मङ्गलं हनुमत्प्रियः ॥ ॥३॥ मङ्गलं परमानन्दो मङ्गलं परमेश्वरः । मङ्गलं श्रीपतिः स्वामी मङ्गलं पद्मलोचनः ॥ ॥४॥ मङ्गलं करुणासिन्धुः मङ्गलं विश्वपालकः । मङ्गलं सच्चिदानन्दो मङ्गलं जगदीश्वरः ॥ ॥५॥ मङ्गलं श्रीरङ्गनाथो मङ्गलं पुरुषोत्तमः । मङ्गलं कमलाकान्तो मङ्गलं भक्तवत्सलः ॥ ॥६॥ मङ्गलं कमलानन्दो मङ्गलं कमलालयः । मङ्गलं...

shri-hanumat-stotram-vyasa-krit/hanuman/ श्री हनुमत् स्तोत्रम्

श्री हनुमत् स्तोत्रम् (व्यास कृत) | Hanumat Stotram Lyrics in Hindi श्री हनुमत् स्तोत्रम् (व्यास कृत)... श्री हनुमत् स्तोत्रम् महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से भक्तों को साहस, बल, बुद्धि, यश, धन तथा सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। भगवान हनुमान की कृपा से जीवन में सफलता, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। ॥ श्रीहनुमत् स्तोत्रम् ॥ ॥ १ ॥ नमामि दूतं रामस्य सुखदं च सुरद्रुमम् । पीनवृत्तमहाबाहुं सर्वशत्रुनिबर्हणम् ॥ ॥ २ ॥ नानारत्नसमायुक्तकुण्डलादिविभूषितम् । सर्वदाभीष्टदातारं सतां वै दृढमाहवे ॥ ॥ ३ ॥ वासिनं चक्रतीर्थस्य दक्षिणस्थगिरौ सदा । तुङ्गाम्भोधितरङ्गस्य वातेन परिशोभिते ॥ ॥ ४ ॥ नानादेशागतैः सद्भिः सेव्यमानं नृपोत्तमैः । धूपदीपादिनैवेद्यैः पञ्चखाद्यैश्च शक्तितः ॥ ...