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Chalisa-Rahu-Shree Rahu Chalisa/श्री राहु चालीसा

राहु ग्रह को समर्पित चालीसा — शांति, कृपा और कल्याण राहु ग्रह को समर्पित चालीसा... राहु ग्रह को समर्पित यह चालीसा उनके अशुभ प्रभावों को शांत करने, कालसर्प दोष का निवारण करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का सशक्त साधन है। राहु ग्रह ज्योतिष में एक छाया ग्रह माने जाते हैं। ये ग्रह जीवन में अचानक परिवर्तन, भौतिक सुख-सुविधाएँ, इच्छाएँ, बाधाएँ और मानसिक अशांति से जुड़े होते हैं। यदि राहु की स्थिति कुंडली में अशुभ हो, तो यह कालसर्प दोष, पितृ दोष, आर्थिक संकट, मानसिक तनाव और शत्रु बाधाओं जैसी समस्याएँ उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसे में राहु चालीसा का नियमित पाठ अत्यंत लाभकारी होता है। ॥ श्री राहु चालीसा ॥ ॥ दोहा ॥ नमो नमः श्री राहु सुखकारी। कष्ट हरन, कृपा करन, भक्त-हित उन्मुख भारी॥ जयति जयति प्रभु राहु महाराज। भव-बंधन हरि, करहु सेवक का काज॥ ॥ चौपाई ॥ जयति जयति श्री राहु दयाला। सदा भक्तन के संकट हारा॥ सर्पाकार, फणी धर शेषा। राहु देव, स...

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राहु स्तोत्र | राहु ग्रह दोष निवारण का शक्तिशाली वैदिक उपाय श्री राहु स्तोत्र... राहु स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक स्तोत्र है, जिसका पाठ राहु ग्रह की कृपा प्राप्त करने और उसकी अशुभ दशा, पीड़ा अथवा दोषों (जैसे कालसर्प दोष, राहु महादशा, ग्रहण योग, या राहु काल) को शांत करने हेतु किया जाता है। यह स्तोत्र राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव को शांति देने हेतु विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इसका नियमित पाठ रोग, शत्रु बाधा, मानसिक भ्रम, और ग्रहदोष से मुक्ति दिलाता है। यह स्तोत्र राहु देव के स्वरूप, उनके अद्वितीय गुणों, प्रभावों और ब्रह्मांड में उनके रहस्यमय स्थान का वर्णन करता है। ॥ श्री राहु स्तोत्र ॥ राहुर्दानवमंत्री च सिंहिकाचित्तनन्दन: । अर्धकाय: सदा क्रोधी चन्द्रादित्य विमर्दन: ।। 1 ।। रौद्रो रूद्रप्रियो दैत्य: स्वर्भानु र्भानुभीतिद: । ग्रहराज सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुक: ।। 2 ।। कालदृष्टि: कालरूप: श्री कण्ठह्रदयाश्रय: । बिधुंतुद: सैंहिकेयो घोररूपो महाबल: ।। 3 ।। ग्रहपीड़ाकरो दंष्टो रक्तनेत्रो महोदर: । ...