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Showing posts with the label रक्षा कवच

shiv-brahmand-vijay-kavach/ब्रह्माण्डविजय नामक दिव्य कवच

भगवान शिव का ब्रह्माण्डविजय कवच | सम्पूर्ण पाठ व लाभ भगवान शिव का ब्रह्माण्डविजय कवच... ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय परशुराम ने युद्ध में कार्तवीर्य अर्जुन को पराजित करने के लिए शृंगधारी संन्यासी का वेश धारण किया और उससे उसका ‘ब्रह्माण्डविजय’ नामक दिव्य कवच दान में माँग लिया। यह कवच इतना शक्तिशाली था कि उसके रहते कार्तवीर्य अर्जुन को कोई भी पराजित नहीं कर सकता था। कवच प्राप्त करने के बाद परशुराम ने मत्स्यराज अर्जुन को युद्ध में धराशायी कर दिया। इसी प्रसंग में महर्षि नारद ने भगवान नारायण से प्रश्न किया — “हे महाभाग नारायण! मत्स्यराज कार्तवीर्य अर्जुन ने जो शिवप्रदत्त कवच धारण किया था, उसका विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए, क्योंकि उसे सुनने के लिए मेरा हृदय अत्यंत कौतूहल से भरा हुआ है।” ॥ ‘ब्रह्माण्डविजय’ नामक दिव्य कवच ॥ ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ नारायण बोले— कवचं भृणु विप्रेंद्र शंकरस्य महामनः। ब्रह्माण...

Durga-Kavach-labh/Maa Durga/श्री दुर्गा कवचम्

श्री दुर्गा कवचम् | रूप, जय, यश और सर्व बाधा निवारण का अचूक पाठ श्री दुर्गा कवचम् का सारांश एवं लाभ... श्री दुर्गा कवचम् देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) का एक अत्यंत प्रभावशाली एवं पवित्र अंग है। यह कवच माँ दुर्गा की नौ स्वरूपों की स्तुति और साधक की सम्पूर्ण देह की रक्षा के लिए रचा गया है। इसमें देवी के विभिन्न रूपों द्वारा शरीर के अंगों की सुरक्षा की प्रार्थना की गई है — सिर से लेकर पाद तक। यह कवच साधक को भय, रोग, शत्रु, जादू-टोना, ग्रह-बाधा और सभी नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रखता है। ॥ श्री दुर्गा कवचम् ॥ ॥ पूर्व-पीठिका ॥ शृणु देवि! प्रवक्ष्यामि, कवचं सर्व सिद्धिदम् । पठित्वा धारयित्वा च नरो मुच्यते सङ्कटात् ॥ १ ॥ भावार्थ: हे देवि! सब सिद्धियों के देनेवाले ‘कवच’ को कहूँगा, सुनो। इसको पढ़कर एवं धारण कर मनुष्य संकट से छूट जाता है। अज्ञात्वा कवचं देवि!, दुर्गा-मन्त्रं च यो जपेत् । स नाप्नोति फलं तस्य, परे च नरकं व्रजेत् ॥ २ ॥ भावार्थ: हे देवि! इस ‘कवच’ को जाने बिना जो दुर्गा मन्त्र का जप करता है, वह उस ज...

Goraksh Kavach - Sanskrt Paath-Dhyaan evan jaap vidhi/श्री गोरक्ष कवच

गुरु गोरखनाथ जी द्वारा प्रदत्त रक्षात्मक स्तोत्र श्री गोरक्ष कवच (संस्कृत पाठ सहित)... गोरक्ष कवच नाथ योग परंपरा के अद्भुत रचनाओं में से एक है। यह एक रक्षात्मक स्तोत्र (कवच) है जो शरीर, मन और आत्मा की रक्षा करता है। यह विशेष रूप से उन साधकों द्वारा पढ़ा जाता है जो योग, तंत्र, साधना, और गुरु-भक्ति मार्ग पर चलते हैं। (गुरु गोरखनाथ जी द्वारा प्रदत्त रक्षात्मक स्तोत्र) ॥ श्रीगोरक्ष कवचम् ॥ ॐ अस्य श्रीगोरक्षकवचमन्त्रस्य शिवऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीगोरक्षनाथो देवता, योगिनी बीजम्, हंसः शक्तिः, गुरुरिति कीलकम्। श्रीगोरक्षनाथप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः॥ स्तोत्र प्रारंभ: ॐ गोरक्षो मे शिरः पातु, ललाटं गुरुनायकः। नेत्रे मम रथस्थश्च, कर्णौ योगीश्वरोऽवतु॥ 1 ॥ नासिकां नाथनाथश्च, वदनं विश्वरक्षकः। जिव्हां मे सिद्धनाथश्च, दन्तान् मे योगराट् सदा॥ 2 ॥ कण्ठं मे कण्ठमालश्च, स्कन्धौ सिद्धेश्वरोऽवतु। भुजौ बलार्करूपश्च, हस्तौ मे पातु बल्यभूः॥ 3 ॥ हृदयं मे सदा रक्षेद् ध्यानयोगपरायणः। नाभिं पातु महामायावी, पृष्ठं योगविभूतिधृक्॥ 4 ॥ कटिं रक्षतु योगात्मा, ग...

Suryakavach/सूर्य कवच संस्कृत में/Suryasya Kavach

सूर्य कवच | मूल संस्कृत पाठ, लाभ, मन्त्र एवं महत्व सूर्य कवच — महत्व और लाभ... सूर्य कवच एक रक्षात्मक स्तोत्र है। इसका पाठ करने से शरीर स्वस्थ रहता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सूर्य देव को जीवनशक्ति, तेज और ओज का प्रदाता माना गया है; अतः इस कवच का पाठ तन, मन और आत्मा पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। पौराणिक महत्व: पुराणों के अनुसार, मकर संक्रांति के पावन दिन यदि इस कवच का पाठ किया जाए तो उसका फल अत्यधिक माना गया है। परंपरा यह बताती है कि इस दिन किया गया पाठ सात पीढ़ियों तक रक्षा प्रदान कर सकता है। मकर संक्रांति और उत्तरायण: मकर संक्रांति के समय सूर्या उत्तरायण होते हैं — अर्थात् सूर्य का चक्र उत्तर दिशा की ओर बढ़ना प्रारम्भ करता है। यह समय आध्यात्मिक अभ्यास, तप और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए सूर्य कवच का पाठ इस दिन विशेष प्रभावकारी होता है। सूर्य कवच Play Audio श्री गणेशाय नमः शृणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शु...

kaalee kavach\Kali Kavach in Hindi-76345687438

माँ काली कवच माँ काली कवच... !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! माँ काली कवच को मूल संस्कृत में है और उसका हिन्दी में अर्थ भी दिया है। माँ काली कवच के बारे में विश्वामित्र सहिंता में जानकारी है कि कवच किसी भी तरह की बीमारी को उसके जड़ मूल से समाप्त करने में बहुत प्रभावकारी है। शास्त्रों में उल्लेख है कि जब भी देवतागण किसी संकट से घिर जाया करते थे तब वे इस कवच का प्रयोग कर अपनी आत्मरक्षा करते थे। यह कवच समस्त बुराइयों का खात्मा करने वाली शक्ति प्रदान करता है। साधक को चाहिए कि पाठ करते समय मूल श्लोक संस्कृत का ही पाठ करें। || माँ काली कवच || || भैरव्युवाच || कालीपूजा श्रुता नाथ भावाश्च विविध: प्रभो । इदानीं श्रोतुमिच्छामि कवचं पूर्वसूचितम् ।। त्वमेव शरणं नाथ त्राहि मां दु:खसङ्कटात् । त्वमेव स्त्रष्टा पाता च संहर्ता च त्वमेव हि ।। टीका – भैरवी ने कहा-हे नाथ ! हे प्राणवल्लभे, प्रभो ! मैने कालीपूजा और उसके विविध भाव सुने, अब पूर्व सूचित कवच सुनने की इच्छा हुई है, उसको वर्णन करके दुःख-संकट से मेरी रक्षा कीजिये। आप ही रचना...

Maa Chhinnamasta\Chhinnamasta Kavach in Hindi -746738863

छिन्नमस्ता कवच | BHAKTI GYAN छिन्नमस्ता कवच... !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! माँ छिन्नमस्ता देवी का कवच शत्रुओं का नाश करने वाला है। इसके पाठ करने से साधक की शत्रु से रक्षा होती है तथा मॉ आद्य भवानी की कृपा प्राप्त होती है। माँ भगवती छिन्नमस्ता देवी के भक्तों को सदा इस कवच का पाठ करते रहना चाहिए। जिसे साधक को यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता, सफलता, आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्त होता है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। || छिन्नमस्ता कवच || हुं बीजात्मका देवी मुण्डकर्तृधरापरा। हृदय पातु सा देवी वर्णिनी डाकिनीयुता।। श्रीं ह्रीं हुं ऐं चैव देवी पुर्व्वास्यां पातु सर्वदा। सर्व्वांगं मे सदा पातु छिन्नमस्ता महाबला।। वज्रवैरोचनीये हुं फट् बीजसमन्विता। उत्तरस्यां तथाग्नौ च वारुणे नैऋर्तेऽवतु।। इन्द्राक्षी भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी। सर्व्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै।। इदं कवचमज्ञात्वा यो जपेच्छिन्नमस्तकाम्। न तस्य फलसिद्धिः स्यात्कल्पकोटिशतैरपि।। ।। इति श्रीछिन्नमस्ता कवचम् सम्पूर्णं ।। माँ छिन्नमस्त...

Maa Bhuvaneshwari\Bhuvaneshwari Kavach -73543655665

माँ भुवनेश्वरी कवच | BHAKTI GYAN माँ भुवनेश्वरी कवच... !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! माँ भुवनेश्वरी - संसार भर के ऐश्वयर् की स्वामिनी आदिशक्ति दुर्गा माता के दस महाविद्याओं का पंचम स्वरूप है जिस रूप में इन होने त्रिदेवो को दर्शन दिये थे। माँ भुवनेश्वरी ही शताक्षी और शाकंभरी देवी के नाम से विख्यात है। माँ भुवनेश्वरी कवच का पाठ करने वाले व्यक्ति को यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता, सफलता, आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्त होता है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। माँ भुवनेश्वरी कवच ह्रीं बीजं मे शिर: पातु भुवनेश्वरी ललाटकम् । ऐं पातु दक्षनेत्रं मे ह्रीं पातु वामलोचनम् ।। श्रीं पातु दक्षकणर्ण मे त्रिवर्णात्मा महेश्वरी । वामकर्ण सदा पातु ऐं घ्राणं पातु मे सदा ।। ह्रीं पातु वदनं देवी ऐं पातु रसनां मम । श्रीं स्कन्धौ पातु नियतं ह्रीं भुजौ पातु सर्वदा ।। क्लीं करौ त्रिपुरेशानी त्रिपुरैश्वर्यदायिनी ।। ॐ पातु ह्रदयं ह्रीं मे मध्यदेशं सदाऽवतु । क्री पातु नाभिदेशं सा त्र्यक्षरी भुवनेश्वरी ।। सर्वबीजप्रदा पृष्ठं पातु सर्ववशंकरी । ...