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Showing posts with the label भगवान शिव

Sarvadev-Gayatri-Mantra/Spiritual Mantras/सर्वदेव गायत्री मंत्र

सर्वदेव गायत्री मंत्र | सम्पूर्ण पाठ, महत्व, लाभ एवं फलश्रुति सर्वदेव गायत्री मंत्र- सम्पूर्ण पाठ, महत्व एवं लाभ... सर्वदेव गायत्री मंत्र विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित दिव्य गायत्री मंत्रों का संग्रह है। इन मंत्रों के नियमित जप से बुद्धि, ज्ञान, शांति, आध्यात्मिक उन्नति तथा ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। सनातन धर्म में गायत्री मंत्रों को अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है। ॥ सर्वदेव गायत्री मंत्र ॥ ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥ ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥ ॐ दाशरथाय विद्महे जानकीवल्लभाय धीमहि । तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥ ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे भूमिजायै धीमहि । तन्नः सीता प्रचोदयात् ॥ ॐ दाशरथाय विद्महे उर्मिलानाथाय धीमहि । तन्नो लक्ष्मणः प्रचोदयात् ॥ ॐ अञ्जनीसुताय विद्महे वायुपुत्राय...

shankaracharya-virachit-shiv-manas-pooja/शंकराचार्य-विरचित शिव-मानस-पूज

शंकराचार्य-विरचित शिव-मानस-पूजा | अर्थ, महत्व, पाठ विधि और आध्यात्मिक लाभ शंकराचार्य-विरचित शिव-मानस-पूजा... शंकराचार्य-विरचित शिव-मानस-पूजा भगवान शिव की एक अत्यंत प्रसिद्ध और भावपूर्ण स्तुति है, जिसकी रचना आदि गुरु आदि शंकराचार्य ने की थी। यह स्तोत्र केवल पूजा का वर्णन नहीं करता, बल्कि भक्ति, ध्यान और अद्वैत वेदांत का गहन दर्शन प्रस्तुत करता है। आज के युग में, जब हर व्यक्ति व्यस्त जीवन जी रहा है और विस्तृत विधि-विधान से पूजा करना संभव नहीं होता, तब शिव-मानस-पूजा हमें सिखाती है कि सच्ची पूजा बाहरी सामग्री से नहीं, बल्कि शुद्ध भावना और एकाग्र मन से होती है। शिव-मानस-पूजा क्या है? “मानस पूजा” का अर्थ है — मन में की गई पूजा । इस स्तोत्र में भक्त अपने हृदय में भगवान शिव के लिए रत्नों का आसन, हिमजल से स्नान, दिव्य वस्त्र, चंदन, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करता है। यह स्तुति हमें बताती है कि यदि हमारे पास भौतिक साधन न भी हों, तो भी हम पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं। शंकराचार्य-विरचित शिव-मानस-पू...

asitkritam-shiv-stotram-mrityunjay-mahadev-mahima/असितकृतं शिवस्तोत्रम्

मृत्युंजय महादेव की महिमा | असितकृतं शिवस्तोत्रम् असितकृतं शिवस्तोत्रम्... असितकृतं शिवस्तोत्रम् भगवान शिव की महिमा का एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र महर्षि असित द्वारा रचित माना जाता है और इसमें भगवान शिव के कालातीत, गुणातीत और मृत्युंजय स्वरूप का दिव्य वर्णन मिलता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन भक्तों के लिए फलदायक है जो जीवन के संकटों, भय, रोग और मृत्यु के भय से मुक्ति चाहते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करने से मन को शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। ॥ असितकृतं शिवस्तोत्रम् ॥ असित उवाच जगद्गुरो नमस्तुभ्यं शिवाय शिवदाय च। योगीन्द्राणां च योगीन्द्र गुरुणां गुरवे नमः॥ १॥ मृत्योर्मृत्युस्वरूपेण मृत्युसंसारखण्डन। मृत्योरीश मृत्यबीज मृत्युञ्जय नमोऽस्तु ते॥ २॥ कालस्वरूपं कलयतां कालकालेश कारण। कालातीत कालस्य कालकाल नमोऽस्तु ते॥ ३॥ गुणातीत गुणाधार गुणबीज गुणात्मक। गुणीश गुणिनां बीज गुणिनां गुरवे नमः॥ ४॥ ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मज्ञ ब्रह्मभावनतत्पर। ब्रह्मबीजस्वरूपेण ब्रह्मबीज ...

laghu-shiv-rudrabhishek-stotra/लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र

लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र | शिव कृपा प्राप्ति का दिव्य स्तोत्र लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र... लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र भगवान शिव की आराधना हेतु अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र रुद्राभिषेक के समय विशेष रूप से पाठ किया जाता है। इसमें भगवान शिव के विभिन्न दिव्य स्वरूपों और उनके गुणों का सुंदर वर्णन मिलता है। यह स्तोत्र भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और शिव कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है। लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र का महत्व: यह स्तोत्र भगवान शिव के रुद्र स्वरूप को प्रसन्न करने वाला है। रुद्राभिषेक के समय इसका पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है। जीवन की बाधाओं, रोगों और संकटों से मुक्ति मिलती है। साधक के पापों का क्षय होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ॥ लघु शिव रुद्राभिषेक स्तोत्र ॥ ॐ सर्वदेवायो नमः । ॐ नमो भवाय शर्वाय रुद्राय वरदाय च । पशूनां पतये नित्यं उग्राय च कपर्दिने ॥ 1 ॥ महादेव...

parvati-vallabh-ashtakam-shiv-kripa-stotra/पार्वती वल्लभ अष्टकम्

पार्वती वल्लभ अष्टकम् का महत्व और लाभ | Shiv Bhakti Stotra पार्वती वल्लभ अष्टकम् – शिव भक्ति का दिव्य स्तोत्र... पार्वती वल्लभ अष्टकम् भगवान शिव की स्तुति में रचित एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है। इस दिव्य रचना में शिवजी के अनेक स्वरूपों, गुणों, करुणा, वैराग्य और महिमा का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है। “पार्वती वल्लभ” का अर्थ है — माता पार्वती के प्रिय स्वामी, अर्थात भगवान शिव। यह स्तोत्र भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति और शिव कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है। ॥ पार्वती वल्लभ अष्टकम् ॥ नमो भूतनाथ नमो देवदेवं नमः कालकालं नमो दिव्यतेजम्। नमः कामभस्मं नमः शांतशीलं भजे पार्वतीवल्लभं नीलकंठम् ॥1॥ सदा तीर्थसिद्धं सदा भक्तरक्षं सदा शैवपूज्यं सदा शुभ्रमक्षम। सदा ध्यानयुक्तं सदा ज्ञानतत्त्वं भजे पार्वतीवल्लभं नीलकंठम् ॥2॥ श्मशाने शयानं महारण्यवासं शरीरं गजानां सदा पार्वतेशम्। पिशाचाधिनाथं पशुना पतिं च भजे पार्वतीवल्लभं नीलकंठम् ॥3॥ फणीभूषणं भुजगालंकृतांगं गले रुद्रमालं महावीरशूरम्। कट्यां व्याघ...

namah-shivaya-panchakshar-stotra-शिव पंचाक्षर स्तोत्र -सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ

शिव पंचाक्षर स्तोत्र | सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ शिव पंचाक्षर स्तोत्र (पूर्ण पाठ)... ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय शिव पंचाक्षर स्तोत्र भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पावन और प्रभावशाली स्तोत्र है। इसकी रचना आदि शंकराचार्य द्वारा की गई मानी जाती है। इस स्तोत्र का आधार मंत्र है — “नमः शिवाय” , जिसके पाँच पवित्र अक्षर न, म, शि, व, य पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का प्रतीक हैं। इन अक्षरों के माध्यम से महादेव की महिमा, करुणा और तत्त्वज्ञान का गूढ़ वर्णन मिलता है। शिव पंचाक्षर स्तोत्र नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नमः शिवाय॥ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै म काराय नमः शिवाय॥ शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शि काराय नमः शिवाय॥ वश...