श्री हनुमत् स्तोत्रम् (व्यास कृत)...
श्री हनुमत् स्तोत्रम् महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से भक्तों को साहस, बल, बुद्धि, यश, धन तथा सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। भगवान हनुमान की कृपा से जीवन में सफलता, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
॥ श्रीहनुमत् स्तोत्रम् ॥
॥ १ ॥
नमामि दूतं रामस्य सुखदं च सुरद्रुमम् ।
पीनवृत्तमहाबाहुं सर्वशत्रुनिबर्हणम् ॥
॥ २ ॥
नानारत्नसमायुक्तकुण्डलादिविभूषितम् ।
सर्वदाभीष्टदातारं सतां वै दृढमाहवे ॥
॥ ३ ॥
वासिनं चक्रतीर्थस्य दक्षिणस्थगिरौ सदा ।
तुङ्गाम्भोधितरङ्गस्य वातेन परिशोभिते ॥
॥ ४ ॥
नानादेशागतैः सद्भिः सेव्यमानं नृपोत्तमैः ।
धूपदीपादिनैवेद्यैः पञ्चखाद्यैश्च शक्तितः ॥
॥ ५ ॥
भजामि श्रीहनूमन्तं हेमकान्तिसमप्रभम् ।
व्यासतीर्थयतीन्द्रेण पूजितं प्रणिधानतः ॥
॥ ६ ॥
त्रिवारं यः पठेन्नित्यं स्तोत्रं भक्त्या द्विजोत्तमः ।
वाञ्छितं लभतेऽभीष्टं षण्मासाभ्यन्तरे खलु ॥
॥ ७ ॥
पुत्रार्थी लभते पुत्रं यशोऽर्थी लभते यशः ।
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ॥
॥ ८ ॥
सर्वथा मास्तु सन्देहो हरिः साक्षी जगत्पतिः ।
यः करोत्यत्र सन्देहं स याति निरयं ध्रुवम् ॥
॥ इति श्री व्यासतीर्थ विरचितं हनुमत् स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
श्री हनुमत् स्तोत्रम् का महत्व:
- भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है।
- भय, बाधा और शत्रुओं से रक्षा होती है।
- बुद्धि, बल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- विद्या, यश और धन की प्राप्ति होती है।
- संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है।
- आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति मिलती है।
पाठ करने की विधि:
प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान श्रीराम, माता सीता एवं श्री हनुमान जी का स्मरण करें। दीप एवं धूप अर्पित करके श्रद्धा और विश्वास के साथ इस स्तोत्र का पाठ करें। मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
फलश्रुति:
इस स्तोत्र में स्वयं वर्णित है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक तीन बार इसका पाठ करता है, वह छह माह के भीतर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति प्राप्त करता है। पुत्र की इच्छा रखने वाले को पुत्र, यश चाहने वाले को यश, विद्यार्थी को विद्या तथा धन चाहने वाले को धन प्राप्त होता है।
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