Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2025

ketu-grah-chalisa-buddhi-vani-vyapar

केतु चालीसा: आत्मबोध, संतुलन और सत्य का मार्ग केतु चालीसा: आत्मबोध, संतुलन और सत्य का मार्ग... केतु ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में एक रहस्यमय और आध्यात्मिक ग्रह माना गया है। यह ग्रह वैराग्य, मोक्ष, अंतर्ज्ञान, सूक्ष्म बुद्धि और पूर्व जन्म के संस्कारों का प्रतिनिधित्व करता है। श्री केतु चालीसा के नियमित पाठ से साधक को मानसिक स्पष्टता, वाणी में प्रभाव, व्यापार में विवेक और जीवन में संतुलन प्राप्त होता है। केतु को छाया ग्रह कहा गया है, परंतु इसकी कृपा मिलने पर व्यक्ति भौतिक उलझनों से ऊपर उठकर आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है। जिन जातकों की कुंडली में केतु ग्रह अशुभ या कमजोर स्थिति में होता है, उनके लिए श्री केतु चालीसा का पाठ एक प्रभावशाली और फलदायी उपाय माना गया है। श्रद्धा, विश्वास और नियमित जप से केतु देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में शांति, विवेक और आत्मिक संतुलन का विकास होता है। केतु ग्रह का आध्यात्मिक स्वरूप: केतु को सर्प के धड़ के रूप में दर्शाया गया है, जो अहंकार के त्याग और आत्मबोध का प्रतीक है। ...

guru-vandana-adhyatmik-labh

गुरु वंदना (गुरु स्तुति) के लाभ | Guru Vandana Benefits गुरु वंदना (गुरु स्तुति)... यह गुरु वंदना श्रद्धा, विश्वास और नियमित भाव से पाठ करने पर साधक के जीवन में गहरे, स्थायी और कल्याणकारी परिवर्तन लाती है। गुरु आराधना के समय इसका उच्चारण अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके पाठ से वातावरण शुद्ध होता है , नकारात्मक ऊर्जा का क्षय होता है और सकारात्मक दिव्य कंपन उत्पन्न होते हैं। गुरु वंदना के प्रभाव से साधना-स्थल पवित्र बनता है, जिससे देवताओं का आह्वान सहज रूप से होता है और गुरु कृपा का प्रवाह बढ़ता है। यह स्तुति साधक के मन को एकाग्र करती है, चित्त को स्थिर बनाती है और अहंकार, भय तथा संशय को दूर करती है। इसके प्रभाव से साधना में आने वाली बाधाएँ समाप्त होती हैं और साधना सफल होती है । नियमित पाठ से गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा विकसित होती है, जिससे जीवन में सही मार्गदर्शन, विवेक और आत्मबल की प्राप्ति होती है। यह वंदना केवल वाणी का पाठ नहीं, बल्कि गुरु-तत्त्व से जुड़ने का माध्य...