केतु चालीसा: आत्मबोध, संतुलन और सत्य का मार्ग केतु चालीसा: आत्मबोध, संतुलन और सत्य का मार्ग... केतु ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में एक रहस्यमय और आध्यात्मिक ग्रह माना गया है। यह ग्रह वैराग्य, मोक्ष, अंतर्ज्ञान, सूक्ष्म बुद्धि और पूर्व जन्म के संस्कारों का प्रतिनिधित्व करता है। श्री केतु चालीसा के नियमित पाठ से साधक को मानसिक स्पष्टता, वाणी में प्रभाव, व्यापार में विवेक और जीवन में संतुलन प्राप्त होता है। केतु को छाया ग्रह कहा गया है, परंतु इसकी कृपा मिलने पर व्यक्ति भौतिक उलझनों से ऊपर उठकर आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है। जिन जातकों की कुंडली में केतु ग्रह अशुभ या कमजोर स्थिति में होता है, उनके लिए श्री केतु चालीसा का पाठ एक प्रभावशाली और फलदायी उपाय माना गया है। श्रद्धा, विश्वास और नियमित जप से केतु देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में शांति, विवेक और आत्मिक संतुलन का विकास होता है। केतु ग्रह का आध्यात्मिक स्वरूप: केतु को सर्प के धड़ के रूप में दर्शाया गया है, जो अहंकार के त्याग और आत्मबोध का प्रतीक है। ...
जीवने यत् प्राप्तम् तदर्थं कृतज्ञतां धारयतु, यत् न प्राप्तम् तदर्थं धैर्यं धारयतु।