गुरु वंदना (गुरु स्तुति) के लाभ | Guru Vandana Benefits
गुरु वंदना (गुरु स्तुति)...
यह गुरु वंदना श्रद्धा, विश्वास और नियमित भाव से पाठ करने पर साधक के जीवन में
गहरे, स्थायी और कल्याणकारी परिवर्तन लाती है। गुरु आराधना के समय इसका उच्चारण
अत्यंत फलदायी माना गया है।
इसके पाठ से वातावरण शुद्ध होता है, नकारात्मक ऊर्जा का क्षय होता है और
सकारात्मक दिव्य कंपन उत्पन्न होते हैं। गुरु वंदना के प्रभाव से साधना-स्थल
पवित्र बनता है, जिससे देवताओं का आह्वान सहज रूप से होता है और गुरु कृपा
का प्रवाह बढ़ता है।
यह स्तुति साधक के मन को एकाग्र करती है, चित्त को स्थिर बनाती है और
अहंकार, भय तथा संशय को दूर करती है। इसके प्रभाव से साधना में आने वाली बाधाएँ समाप्त होती हैं
और साधना सफल होती है।
नियमित पाठ से गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा विकसित होती है, जिससे जीवन में
सही मार्गदर्शन, विवेक और आत्मबल की प्राप्ति होती है। यह वंदना केवल वाणी का पाठ नहीं,
बल्कि गुरु-तत्त्व से जुड़ने का माध्यम है, जो साधक को आध्यात्मिक उन्नति,
मानसिक शांति और जीवन में संतुलन प्रदान करती है।
|| गुरु वंदना ||
गुरु वंदना भवसागर तारण कारण है।
भवसागर तारण कारण है रविनन्दन बन्धन खण्डन है॥
शरणागत विकर भीत मने गुरुदेव दया करो दीनजने॥१॥
हरिदंकर तामस भास्कर है तुमि विष्णु प्रजापति शंकर है॥
कुलकुण्डलिनी धुम भंजन है हृदयग्रन्थि विदारण कारण है॥
मम मानस चंचल राजसने गुरुदेव दया करो दीनजने॥४॥
स्थिरसुख मङ्गलनायक है सुखशान्ति वराभय दायक है॥
नयदोष हरे तव नाम गुणे गुरुदेव दया करो दीनजने॥५॥
अभिमान प्रभाव विमर्दक है गतिहीन जने तुमि रक्षक है॥
चित्त शक्ति बोधित भक्तिजने गुरुदेव दया करो दीनजने॥६॥
तव नाम सदा शुभसाधक है पतिताधम मानव पावक है॥
महिमा तव गम्भीर शुद्ध मने गुरुदेव दया करो दीनजने॥७॥
जय सद्गुरु ईश्वर प्रापक है भवरोह विकार विनाशक है॥
मन जेन रहे तव श्रीचरणे गुरुदेव दया करो दीनजने॥८॥
यह गुरु वंदना का श्रद्धा, विश्वास और नियमित भाव से पाठ करने पर साधक के जीवन में गहरे और स्थायी सकारात्मक परिवर्तन होते हैं। इसके प्रमुख आध्यात्मिक, मानसिक और जीवनोपयोगी लाभ निम्नलिखित हैं:
आध्यात्मिक लाभ: गुरु वंदना अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करती है। इसके नियमित पाठ से साधक को गुरु कृपा प्राप्त होती है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह वंदना भवसागर से पार होने में सहायक मानी जाती है और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करती है। साधक के भीतर भक्ति, वैराग्य और आत्मबोध का विकास होता है।
मानसिक लाभ: इस स्तुति के जप से मन की चंचलता शांत होती है और विचारों में स्थिरता आती है। क्रोध, अहंकार, भय और संशय जैसे नकारात्मक भाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। मानसिक तनाव, अशांति और अवसाद से राहत मिलती है, जिससे आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होता है।
जीवनोपयोगी लाभ: गुरु वंदना का पाठ जीवन में आने वाली बाधाओं और विघ्नों को दूर करने में सहायक होता है। गुरु कृपा से सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संतुलन बना रहता है। सुख-शांति, यश, सम्मान और स्थिरता की प्राप्ति होती है तथा पारिवारिक और सामाजिक जीवन में मधुरता आती है।
विशेष प्रभाव: यह वंदना साधक के चित्त को शुद्ध करती है और अंतःकरण में शक्ति का संचार करती है। गुरु चरणों में अटूट श्रद्धा विकसित होती है और जीवन में सही मार्गदर्शन प्राप्त होता है। नियमित पाठ से व्यक्ति आत्मिक रूप से सशक्त बनता है और ईश्वर कृपा का अनुभव करता है।
निष्कर्ष: गुरु वंदना केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक साधन है। श्रद्धा और निरंतरता के साथ किया गया इसका पाठ जीवन, मन और आत्मा—तीनों का कल्याण करता है।
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श्री शिव स्तुति | सरल और प्रभावी स्तुति का पाठ भोले शिव शंकर जी की स्तुति... ॐ नमः शिवाय | ॐ नमः शिवाय | ॐ नमः शिवाय | ॐ नमः शिवाय | ॐ नमः शिवाय भगवान शिव स्तुति : भगवान भोलेनाथ भक्तों की प्रार्थना से बहुत जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। इसी कारण उन्हें 'आशुतोष' भी कहा जाता है। सनातन धर्म में सोमवार का दिन को भगवान शिव को समर्पित है। इसी कारण सोमवार को शिव का महाभिषेक के साथ साथ शिव की उपासना के लिए व्रत भी रखे जाते हैं। अपने परिवार के लिए सुख समृद्धि पाना के लिए सोमवार के दिन शिव स्तुति का जाप करना आपके लिए लाभकारी होगा और स्तुति का सच्चे मन से करने पर भोले भंडारी खुश होकर आशीर्वाद देते है। ॥ शिव स्तुति ॥ ॥ दोहा ॥ श्री गिरिजापति बंदि कर चरण मध्य शिर नाय। कहत गीता राधे तुम मो पर हो सहाय॥ कविता नंदी की सवारी नाग अंगीकार धारी। नित संत सुखकारी नीलकण्ठ त्रिपुरारी हैं॥ गले मुण्डमाला भारी सर सोहै जटाधारी। बाम अंग में बिहारी गिरिजा सुतवारी हैं॥ दानी बड़े भारी शेष शारदा पुकारी। काशीपति मदनारी कर शूल च्रकधारी हैं॥ कला जाकी उजियारी लख ...
भगवान शिव की आरती | BHAKTI GYAN भगवान शिव की आरती... ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: भगवान शिव की पूजा के समय मन के भावों को शब्दों में व्यक्त करके भी भगवान आशुतोष को प्रसन्न किया जा सकता है। भगवान शिव की आरती से हम भगवान भोलेनाथ के चरणों में अपने स्तुति रूपी श्रद्धासुमन अर्पित कर उनका कृपा प्रसाद पा सकते हैं। ॥ झांकी ॥ झांकी उमा महेश की, आठों पहर किया करूँ। नैनो के पात्र में सुधा, भर भर के मैं पिया करूँ॥ वाराणसी का वास हो, और न कोई पास हो। गिरजापति के नाम का, सुमिरण भजन किया करूँ॥ झांकी उमा महेश की....... जयति जय महेश हे, जयति जय नन्द केश हे। जयति जय उमेश हे, प्रेम से मै जपा करूँ॥ झांकी उमा महेश की....... अम्बा कही श्रमित न हो, सेवा का भार मुझको दो। जी भर के तुम पिया करो, घोट के मैं दिया करूँ॥ झांकी उमा महेश की....... जी मै तुम्हारी है लगन, खीचते है उधर व्यसन। हरदम चलायमान हे मन, इसका उपाय क्या करूँ॥ झांकी उमा महेश की....... भिक्षा में नाथ दीजिए, सेवा में मै रहा करूँ। बेकल हु नाथ रात दिन चैन...
श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र... !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! भगवान शिव शंकर जी आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं। यदि भक्त श्रद्धा पूर्वक एक लोटा जल भी अर्पित कर दे तो भी वे प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। 'श्री शिव रुद्राष्टकम' अपने आप में अद्भुत स्तुति है। यदि कोई आपको परेशान कर रहा है तो किसी शिव मंदिर या घर में ही कुशा के आसन पर बैठकर लगातार 7 दिनों तक सुबह शाम 'रुद्राष्टकम' स्तुति का पाठ करने से भगवान शिव बड़े से बड़े शत्रुओं का नाश करते हैं और सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। रामायण के अनुसार, मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम ने रावण जैसे भयंकर शत्रु पर विजय पाने के लिए रामेशवरम में शिवलिंग की स्थापना कर रूद्राष्टकम स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ किया था और परिणाम स्वरूप शिव की कृपा से रावण का अंत भी हुआ था। ॥ श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र ॥ नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम्। निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भज...
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