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Showing posts from January, 2026

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श्री गणपति अथर्वशीर्ष | पाठ, अर्थ, लाभ और विधि श्री गणपति अथर्वशीर्ष... श्री गणपति अथर्वशीर्ष के साथ-साथ गणेश चालीसा और गणेश स्तुति का नियमित पाठ करने से भक्त को विशेष आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं। यह त्रिविध पाठ भगवान गणेश की कृपा को शीघ्र प्राप्त करने का उत्तम साधन माना गया है। नियमपूर्वक श्रद्धा से पाठ करने पर भक्त की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं तथा उसके जीवन से रोग, भय, दोष, शोक और मानसिक डर दूर हो जाते हैं। इससे मन को शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। साथ ही गणेश जी की पूजा करने से आयु, यश, बल, बुद्धि और ज्ञान में निरंतर वृद्धि होती है। जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, सुख-समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है। 卐 श्री गणपति अथर्वशीर्ष 卐 ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि। त्वमेव केवलं कर्ताऽसि। त्वमेव केवलं धर्ताऽसि। त्वमेव केवलं हर्ताऽसि। त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि। त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम्॥ ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि॥१॥ अव त्वं मां। अव वक्तारं। ...

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श्री शारदा चालीसा | आरती, कथा, पूजा विधि और लाभ श्री शारदा चालीसा... माता शारदा को विद्या, ज्ञान और बुद्धि की देवी माना जाता है। वे माँ सरस्वती का ही एक दिव्य स्वरूप हैं। मध्य प्रदेश के मैहर नगर में स्थित शारदा माता का मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह स्थान त्रिकूट पर्वत पर स्थित है, जहाँ माता स्वयं प्रकट हुई थीं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी शारदा ने असुरों का संहार कर देवताओं की रक्षा की थी। वे ब्रह्मा की पुत्री मानी जाती हैं और सृष्टि को ज्ञान, वाणी और विवेक प्रदान करती हैं। महान कवि कालिदास, तुलसीदास, वाल्मीकि, नारद मुनि जैसे अनेक विद्वानों को माता शारदा की कृपा से ही विद्या और यश की प्राप्ति हुई। जो भी श्रद्धा से माता का स्मरण करता है, उसके जीवन से अज्ञान, भ्रम और दुःख दूर हो जाते हैं। ॥ श्री शारदा चालीसा ॥ (माँ शारदा की महिमा में भक्ति-पूर्ण चालीसा) ॥ दोहा ॥ मूर्ति स्वयंभू शारदा, मैहर आन विराज । माला, पुस्तक, धारिणी, वीणा कर में साज ॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय जय शारदा महारानी, आदि शक्ति तुम जग कल्याणी । रूप चतुर्भु...

shiv-brahmand-vijay-kavach/ब्रह्माण्डविजय नामक दिव्य कवच

भगवान शिव का ब्रह्माण्डविजय कवच | सम्पूर्ण पाठ व लाभ भगवान शिव का ब्रह्माण्डविजय कवच... ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय परशुराम ने युद्ध में कार्तवीर्य अर्जुन को पराजित करने के लिए शृंगधारी संन्यासी का वेश धारण किया और उससे उसका ‘ब्रह्माण्डविजय’ नामक दिव्य कवच दान में माँग लिया। यह कवच इतना शक्तिशाली था कि उसके रहते कार्तवीर्य अर्जुन को कोई भी पराजित नहीं कर सकता था। कवच प्राप्त करने के बाद परशुराम ने मत्स्यराज अर्जुन को युद्ध में धराशायी कर दिया। इसी प्रसंग में महर्षि नारद ने भगवान नारायण से प्रश्न किया — “हे महाभाग नारायण! मत्स्यराज कार्तवीर्य अर्जुन ने जो शिवप्रदत्त कवच धारण किया था, उसका विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए, क्योंकि उसे सुनने के लिए मेरा हृदय अत्यंत कौतूहल से भरा हुआ है।” ॥ ‘ब्रह्माण्डविजय’ नामक दिव्य कवच ॥ ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ नारायण बोले— कवचं भृणु विप्रेंद्र शंकरस्य महामनः। ब्रह्माण...