भगवान शिव का ब्रह्माण्डविजय कवच | सम्पूर्ण पाठ व लाभ भगवान शिव का ब्रह्माण्डविजय कवच... ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय परशुराम ने युद्ध में कार्तवीर्य अर्जुन को पराजित करने के लिए शृंगधारी संन्यासी का वेश धारण किया और उससे उसका ‘ब्रह्माण्डविजय’ नामक दिव्य कवच दान में माँग लिया। यह कवच इतना शक्तिशाली था कि उसके रहते कार्तवीर्य अर्जुन को कोई भी पराजित नहीं कर सकता था। कवच प्राप्त करने के बाद परशुराम ने मत्स्यराज अर्जुन को युद्ध में धराशायी कर दिया। इसी प्रसंग में महर्षि नारद ने भगवान नारायण से प्रश्न किया — “हे महाभाग नारायण! मत्स्यराज कार्तवीर्य अर्जुन ने जो शिवप्रदत्त कवच धारण किया था, उसका विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए, क्योंकि उसे सुनने के लिए मेरा हृदय अत्यंत कौतूहल से भरा हुआ है।” ॥ ‘ब्रह्माण्डविजय’ नामक दिव्य कवच ॥ ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ नारायण बोले— कवचं भृणु विप्रेंद्र शंकरस्य महामनः। ब्रह्माण...
जीवने यत् प्राप्तम् तदर्थं कृतज्ञतां धारयतु, यत् न प्राप्तम् तदर्थं धैर्यं धारयतु।