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श्री शारदा चालीसा | आरती, कथा, पूजा विधि और लाभ

श्री शारदा चालीसा...

माता शारदा को विद्या, ज्ञान और बुद्धि की देवी माना जाता है। वे माँ सरस्वती का ही एक दिव्य स्वरूप हैं। मध्य प्रदेश के मैहर नगर में स्थित शारदा माता का मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह स्थान त्रिकूट पर्वत पर स्थित है, जहाँ माता स्वयं प्रकट हुई थीं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी शारदा ने असुरों का संहार कर देवताओं की रक्षा की थी। वे ब्रह्मा की पुत्री मानी जाती हैं और सृष्टि को ज्ञान, वाणी और विवेक प्रदान करती हैं।

महान कवि कालिदास, तुलसीदास, वाल्मीकि, नारद मुनि जैसे अनेक विद्वानों को माता शारदा की कृपा से ही विद्या और यश की प्राप्ति हुई। जो भी श्रद्धा से माता का स्मरण करता है, उसके जीवन से अज्ञान, भ्रम और दुःख दूर हो जाते हैं।

॥ श्री शारदा चालीसा ॥

(माँ शारदा की महिमा में भक्ति-पूर्ण चालीसा)

॥ दोहा ॥

मूर्ति स्वयंभू शारदा, मैहर आन विराज ।
माला, पुस्तक, धारिणी, वीणा कर में साज ॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय शारदा महारानी, आदि शक्ति तुम जग कल्याणी ।
रूप चतुर्भुज तुम्हरो माता, तीन लोक महं तुम विख्याता ॥
दो सहस्त्र वर्षहि अनुमाना, प्रगट भई शारदा जग जाना ।
मैहर नगर विश्व विख्याता, जहाँ बैठी शारदा जग माता ॥
त्रिकूट पर्वत शारदा वासा, मैहर नगरी परम प्रकाशा ।
सर्द इन्दु सम बदन तुम्हारो, रूप चतुर्भुज अतिशय प्यारो ॥
कोटि सुर्य सम तन द्युति पावन, राज हंस तुम्हरो शचि वाहन ।
कानन कुण्डल लोल सुहवहि, उर्मणी भाल अनूप दिखावहिं ॥
वीणा पुस्तक अभय धारिणी, जगत्मातु तुम जग विहारिणी ।
ब्रह्म सुता अखंड अनूपा, शारदा गुण गावत सुरभूपा ॥
हरिहर करहिं शारदा वन्दन, वरुण कुबेर करहिं अभिनन्दन ।
शारदा रूप कहण्डी अवतारा, चण्ड-मुण्ड असुरन संहारा ॥
महिषा सुर वध कीन्हि भवानी, दुर्गा बन शारदा कल्याणी ।
धरा रूप शारदा भई चण्डी, रक्त बीज काटा रण मुण्डी ॥
तुलसी सुर्य आदि विद्वाना, शारदा सुयश सदैव बखाना ।
कालिदास भए अति विख्याता, तुम्हरी दया शारदा माता ॥
वाल्मीकी नारद मुनि देवा, पुनि-पुनि करहिं शारदा सेवा ।
चरण-शरण देवहु जग माया, सब जग व्यापहिं शारदा माया ॥
अणु-परमाणु शारदा वासा, परम शक्तिमय परम प्रकाशा ।
हे शारद तुम ब्रह्म स्वरूपा, शिव विरंचि पूजहिं नर भूपा ॥
ब्रह्म शक्ति नहि एकउ भेदा, शारदा के गुण गावहिं वेदा ।
जय जग वन्दनि विश्व स्वरूपा, निर्गुण-सगुण शारदहिं रूपा ॥
सुमिरहु शारदा नाम अखंडा, व्यापइ नहिं कलिकाल प्रचण्डा ।
सुर्य चन्द्र नभ मण्डल तारे, शारदा कृपा चमकते सारे ॥
उद्भव स्थिति प्रलय कारिणी, बन्दउ शारदा जगत तारिणी ।
दु:ख दरिद्र सब जाहिंन साई, तुम्हारी कृपा शारदा माई ॥
परम पुनीत जगत अधारा, मातु, शारदा ज्ञान तुम्हारा ।
विद्या बुद्धि मिलहिं सुखदानी, जय जय जय शारदा भवानी ॥
शारदे पूजन जो जन करहिं, निश्चय ते भव सागर तरहीं ।
शारद कृपा मिलहिं शुचि ज्ञाना, होई सकल्विधि अति कल्याणा ॥
जग के विषय महा दु:ख दाई, भजहुँ शारदा अति सुख पाई ।
परम प्रकाश शारदा तोरा, दिव्य किरण देवहुँ मम ओरा ॥
परमानन्द मगन मन होई, मातु शारदा सुमिरई जोई ।
चित्त शान्त होवहिं जप ध्याना, भजहुँ शारदा होवहिं ज्ञाना ॥
रचना रचित शारदा केरी, पाठ करहिं भव छटई फेरी ।
सत् – सत् नमन पढ़ीहे धरिध्याना, शारदा मातु करहिं कल्याणा ॥
शारदा महिमा को जग जाना, नेति-नेति कह वेद बखाना ।
सत् – सत् नमन शारदा तोरा, कृपा द्र्ष्टि कीजै मम ओरा ॥
जो जन सेवा करहिं तुम्हारी, तिन कहँ कतहुँ नाहि दु:खभारी ।
जो यह पाठ करै चालीस, मातु शारदा देहुँ आशीषा ॥

॥ दोहा ॥

बन्दऊँ शारद चरण रज, भक्ति ज्ञान मोहि देहुँ ।
सकल अविद्या दूर कर, सदा बसहु उर्गेहुँ ॥
जय-जय माई शारदा, मैहर तेरौ धाम ।
शरण मातु मोहिं लिजिए, तोहि भजहुँ निष्काम ॥

॥ इति श्री शारदा चालीसा सम्पूर्ण ॥

श्री शारदा माता की पूजा विधि:

शारदा माता की पूजा विशेष रूप से विद्या, बुद्धि, स्मरण शक्ति और मानसिक शांति के लिए की जाती है।

पूजा की सामग्री:

  • सफेद वस्त्र
  • माता शारदा की मूर्ति या चित्र
  • चंदन, कुमकुम, अक्षत
  • धूप, दीप, पुष्प
  • फल, मिष्ठान्न
  • वीणा या पुस्तक (प्रतीक रूप में)

पूजा विधि:

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान को साफ करें और माता शारदा की प्रतिमा स्थापित करें।
  3. दीप प्रज्वलित करें और पुष्प अर्पित करें।
  4. माता को चंदन, अक्षत और फल अर्पित करें।
  5. शारदा मंत्र या चालीसा का पाठ करें।
  6. अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

श्री शारदा माता के मंत्र:

1. बीज मंत्र:
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ॥

2. शारदा गायत्री मंत्र:
ॐ वाग्देव्यै च विद्महे, ब्रह्मजायै धीमहि ।
तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥

3. शारदा स्तुति मंत्र:
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता ।
या वीणा वरदण्ड मण्डित करा, या श्वेत पद्मासना ॥
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा ॥

श्री शारदा माता की कृपा से प्राप्त लाभ:

  • विद्या, बुद्धि और स्मरण शक्ति में वृद्धि
  • छात्रों को परीक्षा में सफलता
  • वाणी में मधुरता और प्रभाव
  • मानसिक शांति और एकाग्रता
  • अज्ञान, भ्रम और भय का नाश
  • साहित्य, कला और संगीत में उन्नति
  • जीवन में सुख, शांति और समृद्धि
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