श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्... !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते है। श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् का नियमित पाठ करने से भगवान श्री हनुमान जी ख़ुश होते हैं साथ ही उसकी इच्छा की भी पूर्ति होती है। हर कामना पूर्ण होती है। ॥ श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् ॥ (श्रीपद्मोत्तरखण्डतः) नारद उवाच । सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञ सर्वदेवनमस्कृत । यत्त्वया कथितं पूर्वं रामचन्द्रेण धीमता ॥ १॥ स्तोत्रं समस्तपापघ्नं श्रुत्वा धन्योऽस्मि पद्मज । इदानीं श्रोतुमिच्छामि लोकानां हितकाम्यया ॥ २॥ वायोरंशावतरणमाहात्म्यं सर्वकामदम् । वद मे विस्तराद्ब्रह्मन् देवगुह्यमनुत्तमम् ॥ ३॥ इति पृष्टो नारदेन ब्रह्मा लोकपितामहः । नमस्कृत्य जगन्नाथं लक्ष्मीकान्तं परात्परम् ॥ ४॥ प्रोवाच वायोर्माहात्म्यं नारदाय महात्मने । यच्छ्रुत्वा सर्वसौभाग्यं प्राप्नुवन्ति जनाः सदा ॥ ५॥ ब्रह्मोवाच । इदं रहस्यं ...
जीवने यत् प्राप्तम् तदर्थं कृतज्ञतां धारयतु, यत् न प्राप्तम् तदर्थं धैर्यं धारयतु।