श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्...
सनातन धर्म में भगवान श्री हनुमान जी को शक्ति, साहस, बुद्धि, भक्ति और संकटों से रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन बजरंगबली की उपासना भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शांति का संचार करने वाली मानी जाती है।
श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् भगवान हनुमान जी के 108 पवित्र नामों का महिमामय स्तोत्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्तोत्र का श्रद्धा, विश्वास और एकाग्रचित्त होकर नियमित पाठ करने से जीवन के दुखों, भय, बाधाओं और संकटों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से हनुमान जी के 108 नामों का स्मरण करता है, उस पर पवनपुत्र हनुमान जी की विशेष कृपा बनी रहती है। बजरंगबली की कृपा से भक्तों को मानसिक शांति, साहस, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रेरणा मिलती है।
भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति, परिवार की सुख-शांति, कार्यों में सफलता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना के लिए भी इस पवित्र स्तोत्र का पाठ करते हैं। हालांकि, धार्मिक दृष्टि से स्तोत्र पाठ का सबसे बड़ा उद्देश्य भगवान के प्रति भक्ति, समर्पण और सदाचार की भावना विकसित करना है।
मंगलवार और शनिवार को श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् का पाठ विशेष शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार इसका प्रतिदिन भी पाठ कर सकते हैं।
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी की सच्ची उपासना करने वाले भक्त को जीवन की कठिनाइयों में धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
॥ जय श्री राम ॥
॥ जय बजरंगबली ॥
॥ ॐ श्री हनुमते नमः ॥
॥ श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् ॥
(श्रीपद्मोत्तरखण्डतः)
नारद उवाच ।
ब्रह्मोवाच ।
॥ इति श्रीहनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् संपूर्णं ॥
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