श्री भुवनेश्वरी त्रैलोक्यमोहनकवचम् श्री भुवनेश्वरी त्रैलोक्यमोहनकवचम्... !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! भुवनेश्वरी माता - संसार भर के ऐश्वयर् की स्वामिनी आदिशक्ति दुर्गा माता के दस महाविद्याओं का पंचम स्वरूप है जिस रूप में इनहोने त्रिदेवो को दर्शन दिये थे। मां भुवनेश्वरी ही शताक्षी और शाकंभरी देवी के नाम से विख्यात हुई। श्री भुवनेश्वरी त्रैलोक्यमोहनकवचम् का पाठ करने वाले व्यक्ति को यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता, सफलता, आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्त होता है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। ॥ श्री भुवनेश्वरी त्रैलोक्यमोहनकवचम् ॥ श्री देव्युवाच- भगवन्, परमेशान, सर्वागमविशारद। कवचं भुवनेश्वर्याः कथयस्व महेश्वर!॥ श्री देवी ने कहा- हे सभी आगमों के ज्ञाता भगवन् महेश्वर! भुवनेश्वरी के कवच को बताइये। श्री भैरव उवाच- शृणु देवि, महेशानि! कवचं सर्वकामदम्। त्रैलोक्यमोहनं नाम सर्वेप्सितफलप्रदम्॥ श्री भैरव ने कहा- हे महेशानि! त्रैलोक्यमोहन नामक कवच सभी कामनाओं की पूर्तिं करनेवाला और सभी अभीष्ट फलों का देनेवाला है। उसे सुनो। ...
जीवने यत् प्राप्तम् तदर्थं कृतज्ञतां धारयतु, यत् न प्राप्तम् तदर्थं धैर्यं धारयतु।