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Ganesh Chalisa/Mangalmurti Shree Ganesh Chalisa

गणेश चालीसा | श्री गणेश चालीसा पाठ, लाभ और PDF | Bhakti Gyan

श्री गणेश चालीसा - मंगलमूर्ति श्री गणेश चालीसा वंदना

सनातन धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, अनुष्ठान या धार्मिक आयोजन से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्री गणेश जी की आराधना करने से कार्यों में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और जीवन में शुभता एवं सकारात्मकता का संचार होता है।

श्री गणेश चालीसा भगवान गणेश की महिमा, स्वरूप और कृपा का भक्तिपूर्ण स्तवन है। श्रद्धापूर्वक गणेश चालीसा का पाठ करने से भक्त अपने आराध्य के प्रति भक्ति और समर्पण को प्रकट करता है। नियमित पाठ मन को एकाग्र करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सकारात्मक विचारों को विकसित करने में सहायक माना जाता है।

भगवान श्री गणेश सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति, बुद्धि, ज्ञान और शुभता प्रदान करें तथा सभी विघ्न-बाधाओं को दूर करें।

श्री गणेश चालीसा पाठ की महिमा:

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री गणेश बुद्धि, विवेक, ज्ञान और शुभता के दाता हैं। उनकी आराधना विशेष रूप से किसी नए कार्य की शुरुआत, परीक्षा, व्यवसाय, विवाह, गृह प्रवेश अथवा किसी महत्वपूर्ण कार्य से पहले करना शुभ माना जाता है।

गणेश चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्त को भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होने की भावना मिलती है। यह पाठ मन में सकारात्मकता, श्रद्धा और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक माना जाता है तथा जीवन में आने वाली परिस्थितियों का सामना करने के लिए मनोबल प्रदान करता है।

श्री गणेश चालीसा

जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥

जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ: काजू॥

जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजित मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व-विधाता॥

ऋद्धि सिद्धि तव चँवर डुलावे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगल कारी॥

एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा।

अतिथि जानि कै गौरी सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै। पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥

बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥

सकल मगन सुख मंगल गावहिं। नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥

शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं। सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आए शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक देखन चाहत नाहीं॥

गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो। उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥

कहन लगे शनि मन सकुचाई। का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास उमा कर भयऊ। शनि सों बालक देखन कह्यऊ॥

पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक शिर उड़ि गयो आकाशा॥

गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी। सो दुख दशा गयो नहिं वरणी॥

हाहाकार मच्यो कैलाशा। शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए। काटि चक्र सो गज शिर लाए॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ शंकर डारयो॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी की प्रदक्षिणा लीन्हा॥

चले षडानन भरमि भुलाई। रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहस मुख सकै न गाई॥

मैं मति हीन मलीन दुखारी। करहुँ कौन बिधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। लख प्रयाग ककरा दुर्वासा॥

अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

दोहा

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करें धर ध्यान।

नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥

सम्वत् अपन सहस्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।

पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश॥

गणेश चालीसा का पाठ कब करें?

गणेश चालीसा का पाठ प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ स्थान पर भगवान श्री गणेश की प्रतिमा या चित्र के सामने किया जा सकता है। बुधवार और गणेश चतुर्थी का दिन भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। हालांकि भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार प्रतिदिन भी गणेश चालीसा का पाठ कर सकते हैं।

पाठ करते समय मन को शांत रखें और भगवान श्री गणेश का ध्यान करते हुए श्रद्धा एवं विश्वास के साथ चालीसा का पाठ करें। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक अथवा अपनी श्रद्धा के अनुसार नैवेद्य अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

श्री गणेश जी की पूजा-आराधना करते समय
श्रद्धापूर्वक गणेश चालीसा का पाठ अवश्य करें।

श्री गणेश जी से प्रार्थना:

हे विघ्नहर्ता श्री गणेश जी! हमारे जीवन से सभी विघ्न-बाधाओं को दूर करें। हमें सद्बुद्धि, विवेक, ज्ञान, सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें। हमारे सभी शुभ कार्यों को सफल बनाएं और अपने भक्तों पर सदैव अपनी कृपा बनाए रखें।

गणेश चालीसा से जुड़े प्रश्न और उत्तर:

प्रश्न. गणेश चालीसा क्या है?
उत्तर: गणेश चालीसा भगवान श्री गणेश जी की स्तुति और भक्ति से संबंधित चालीसा पाठ है। इसका श्रद्धापूर्वक पाठ भगवान गणेश जी की आराधना और मंगल की कामना के लिए किया जाता है।
प्रश्न. गणेश चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
उत्तर: गणेश चालीसा का पाठ प्रातःकाल या अपनी सुविधानुसार किसी भी शांत समय में श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।
प्रश्न. गणेश चालीसा पढ़ने से क्या लाभ माना जाता है?
उत्तर: श्रद्धापूर्वक पाठ से मन को शांति, सकारात्मकता और भगवान गणेश जी की कृपा की भावना प्राप्त होती है।
प्रश्न. क्या गणेश चालीसा का PDF डाउनलोड कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ। ऊपर दिए गए Download PDF बटन पर क्लिक करके Print विकल्प के माध्यम से गणेश चालीसा को PDF के रूप में सेव किया जा सकता है।
प्रश्न. गणेश चालीसा में कितनी चौपाइयां होती हैं?
उत्तर: गणेश चालीसा में परंपरागत रूप से चालीस चौपाइयों का पाठ होता है।
प्रश्न. गणेश चालीसा का पाठ क्यों किया जाता है?
उत्तर: भगवान श्री गणेश जी की भक्ति, आराधना तथा जीवन में सुख, शांति और मंगल की कामना के लिए गणेश चालीसा का पाठ किया जाता है।
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