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सूर्याधिकम् — महत्व, लाभ और मकर संक्रांति पर पाठ

सूर्याधिकम् — महत्व और लाभ...

सूर्याधिकम् स्तोत्र का नियमित पाठ शरीर को स्वस्थ, ऊर्जावान और निरोग बनाए रखने में अत्यंत प्रभावी माना गया है।

शास्त्रों में कहा गया है कि यह स्तोत्र सौभाग्य, आत्मबल, तेज और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। इसका अनुशासित पाठ शारीरिक ऊर्जा तथा मनोबल दोनों को बढ़ाता है और रोगों के विरुद्ध रक्षा करने में सहायक होता है।

मकर संक्रांति और विशेष महत्व:

पुराणों में वर्णित है कि मकर संक्रांति के पावन दिन सूर्याधिकम् का पाठ करने से सात पीढ़ियों तक की रक्षा होती है। मकर संक्रांति के समय सूर्य उत्तरायण होते हैं — अर्थात् सूर्य देव उत्तर दिशा की ओर अग्रसर होते हैं — और यह काल आध्यात्मिक उन्नति, तप, साधना और पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस दिन सूर्याधिकम् स्तोत्र का पाठ करने से साधक को विशेष कृपा, स्वास्थ्य लाभ और जीवन में स्थायी सौभाग्य प्राप्त होता है।

॥ सूर्याधिकम् ॥

श्री गणेशाय नमः

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तुते॥१॥

सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम्।
श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥२॥

लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥३॥

त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्माविष्णुमहेश्वरम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥४॥

ब्रह्मतेजःपूज्यं च वायुमाकाशमेव च।
प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥५॥

ब्रह्माक्षरं च पुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम्।
एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥६॥

तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेवःप्रदीपनम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥७॥

तं सूर्यं जगतः नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥८॥

इति श्रीशिवप्रोक्तं सूर्याधिकं सम्पूर्णम् ॥

सूर्याधिकम् स्तोत्र — मुख्य लाभ

शारीरिक स्वास्थ्य और ऊर्जा में वृद्धि: परंपरा में माना जाता है कि इसका नियमित पाठ शरीर में प्राणशक्ति (ऊर्जा) बढ़ाने, कमजोरी कम करने और रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में सहायक होता है।

सौभाग्य और समृद्धि: सूर्य देव को दूत माना जाता है जो जीवन में सौभाग्य, मान-सम्मान और आर्थिक स्थिरता लाने में मदद करते हैं — इसलिए सूर्याधिकम् से सौभाग्य बढ़ने का वर्णन मिलता है।

आत्मिक तेज और आत्मबल (confidence): पाठ से मन में दृढता, आत्मविश्वास और जीवन-उद्देश्य के प्रति स्पष्टता आती है।

मानसिक स्थिरता और मन की शांति: नियमित पाठ ध्यान-सदृश प्रभाव देता है — चित्त शांत होता है, चिंता कम होती है और मानसिक संतुलन मिलता है।

नेत्रों व दृष्टि से संबंधित लाभ (पारम्परिक मान्यता): सूर्य का सम्बन्ध नेत्रों से जोड़ा जाता है — इसीलिए कुछ ग्रंथों में नेत्रलाभ व दृष्टि-शक्ति में सुधार का उल्लेख मिलता है।

परिवार व पूर्वजों की सुरक्षा (पौराणिक कथाएँ): पुराणों में कहा गया है कि मकर संक्रांति के पावन दिन इसका पाठ करने से सात पीढ़ियों तक की रक्षा और पुण्यफल मिलता है — यह एक पारंपरिक धार्मिक विश्वास है।

धार्मिक व आध्यात्मिक उन्नति: उत्तरायण (सूर्य का उत्तर की ओर चलना) के समय इसका पाठ विशेष रूप से पुण्यदायी माना जाता है; साधना और तप के लिए शुभ प्रभाव बताया गया है।

किस तरह पढ़ें?

सर्वोत्तम समय: प्रातः सूर्य उदय के समय अथवा मकर संक्रांति का पर्व। विधि: ध्यान करके शुद्ध मन से पाठ करें; यदि संभव हो तो सूर्यदेव को अर्घ्य दें और नियमितता बनाए रखें।

संबंधित पृष्ठ:
  1. सूर्य कवच संस्कृत में
  2. श्री शिव प्रातः स्मरणस्तोत्रम्
  3. द्वादश ज्योतिर्लिंग
  4. भगवान शिव स्तुति
  5. श्री कालभैरव अष्टकम्
  6. लिंगाष्टकम स्तोत्र
  7. चिन्तामणि षट्पदी स्तोत्र
  8. गणपतितालम्
  9. श्री कालभैरव अष्टकम्
  10. अंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवानी देवी भजन-
  11. 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग
  12. राम रक्षा स्तोत्र
  13. संकटमोचन हनुमानाष्टक
  14. श्री मारुती स्तोत्र
  15. श्री बजरंग बाण
  16. चामुण्डा देवी की चालीसा

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