कालभैरव अष्टकम एक संस्कृत अष्टकम है, जिसे आदि शंकराचार्य ने लिखा है। भैरव भगवान शिव के स्वरूप हैं। इन्हें कलियुग की बाधाओं का शीघ्र निवारण करने वाले देव मानते हैं। खासतौर से प्रेत व तांत्रिक बाधा के दोष उनके पूजन से दूर हो जाते हैं। संतान की दीर्घायु हो या गृहस्वामी का स्वास्थ्य, भगवान भैरव स्मरण और पूजन मात्र से उनके कष्टों को दूर कर देते हैं। भगवान भैरव के पूजन से राहु-केतु शांत हो जाते हैं। उनके पूजन में भैरव अष्टक और भैरव कवच का पाठ जरूर करना, इससे शीघ्र फल मिलता है। साथ ही तांत्रिक व प्रेत बाधा का संकट टल जाता है। यह स्तोत्र समय को नष्ट करने वाले काशी के कालभैरव (भैरव के नाम से भी जाना जाता है) को समर्पित है।
उत्तर:- कालभैरव भगवान शिव का ही उग्र रूप है। वह शिक्षक है, एक क्रूर अवतार जिसने यह सुनिश्चित करने के लिए रूप ग्रहण किया कि सही किया गया था। भगवान शिव के कई अवतारों में, कालभैरव को समय के रक्षक के रूप में जाना जाता है, जैसा कि उनके नाम से पता चलता है। भैरव का दिव्य वाहन कुत्ता है।
प्रश्न: कालभैरव की कहानी क्या है?
उत्तर:- पुराणों के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच युद्ध में राक्षसों को नष्ट करने के लिए शिव ने कालभैरव की रचना की और फिर अष्टांग भैरवों की रचना हुई। आठ भैरवों ने आठ मातृकाओं से विवाह किया जिनका स्वरूप भयानक है। इन अष्ट भैरवों और अष्ट मातृकाओं से 64 भैरवों और 64 योगिनियों की रचना हुई है।
भगवान कालभैरव सौम्य और दयालु हैं। वह समय का रक्षक है और उन लोगों को आशीर्वाद देता है जो इसका सम्मान करते हैं और रचनात्मक उद्देश्यों के लिए इसका उपयोग करते हैं। कालभैरव अष्टमी भगवान भैरव को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा दिन है क्योंकि इसे उनका जन्मदिन माना जाता है।
श्री शिव स्तुति | सरल और प्रभावी स्तुति का पाठ भोले शिव शंकर जी की स्तुति... ॐ नमः शिवाय | ॐ नमः शिवाय | ॐ नमः शिवाय | ॐ नमः शिवाय | ॐ नमः शिवाय भगवान शिव स्तुति : भगवान भोलेनाथ भक्तों की प्रार्थना से बहुत जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। इसी कारण उन्हें 'आशुतोष' भी कहा जाता है। सनातन धर्म में सोमवार का दिन को भगवान शिव को समर्पित है। इसी कारण सोमवार को शिव का महाभिषेक के साथ साथ शिव की उपासना के लिए व्रत भी रखे जाते हैं। अपने परिवार के लिए सुख समृद्धि पाना के लिए सोमवार के दिन शिव स्तुति का जाप करना आपके लिए लाभकारी होगा और स्तुति का सच्चे मन से करने पर भोले भंडारी खुश होकर आशीर्वाद देते है। ॥ शिव स्तुति ॥ ॥ दोहा ॥ श्री गिरिजापति बंदि कर चरण मध्य शिर नाय। कहत गीता राधे तुम मो पर हो सहाय॥ कविता नंदी की सवारी नाग अंगीकार धारी। नित संत सुखकारी नीलकण्ठ त्रिपुरारी हैं॥ गले मुण्डमाला भारी सर सोहै जटाधारी। बाम अंग में बिहारी गिरिजा सुतवारी हैं॥ दानी बड़े भारी शेष शारदा पुकारी। काशीपति मदनारी कर शूल च्रकधारी हैं॥ कला जाकी उजियारी लख ...
भगवान शिव की आरती | BHAKTI GYAN भगवान शिव की आरती... ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: भगवान शिव की पूजा के समय मन के भावों को शब्दों में व्यक्त करके भी भगवान आशुतोष को प्रसन्न किया जा सकता है। भगवान शिव की आरती से हम भगवान भोलेनाथ के चरणों में अपने स्तुति रूपी श्रद्धासुमन अर्पित कर उनका कृपा प्रसाद पा सकते हैं। ॥ झांकी ॥ झांकी उमा महेश की, आठों पहर किया करूँ। नैनो के पात्र में सुधा, भर भर के मैं पिया करूँ॥ वाराणसी का वास हो, और न कोई पास हो। गिरजापति के नाम का, सुमिरण भजन किया करूँ॥ झांकी उमा महेश की....... जयति जय महेश हे, जयति जय नन्द केश हे। जयति जय उमेश हे, प्रेम से मै जपा करूँ॥ झांकी उमा महेश की....... अम्बा कही श्रमित न हो, सेवा का भार मुझको दो। जी भर के तुम पिया करो, घोट के मैं दिया करूँ॥ झांकी उमा महेश की....... जी मै तुम्हारी है लगन, खीचते है उधर व्यसन। हरदम चलायमान हे मन, इसका उपाय क्या करूँ॥ झांकी उमा महेश की....... भिक्षा में नाथ दीजिए, सेवा में मै रहा करूँ। बेकल हु नाथ रात दिन चैन...
श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र... !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! भगवान शिव शंकर जी आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं। यदि भक्त श्रद्धा पूर्वक एक लोटा जल भी अर्पित कर दे तो भी वे प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। 'श्री शिव रुद्राष्टकम' अपने आप में अद्भुत स्तुति है। यदि कोई आपको परेशान कर रहा है तो किसी शिव मंदिर या घर में ही कुशा के आसन पर बैठकर लगातार 7 दिनों तक सुबह शाम 'रुद्राष्टकम' स्तुति का पाठ करने से भगवान शिव बड़े से बड़े शत्रुओं का नाश करते हैं और सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। रामायण के अनुसार, मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम ने रावण जैसे भयंकर शत्रु पर विजय पाने के लिए रामेशवरम में शिवलिंग की स्थापना कर रूद्राष्टकम स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ किया था और परिणाम स्वरूप शिव की कृपा से रावण का अंत भी हुआ था। ॥ श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र ॥ नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम्। निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भज...
चामुण्डा देवी चालीसा | माता चामुंडा आरती, मंत्र व महिमा | Bhakti Gyan चामुण्डा देवी की चालीसा... हिंदू धर्म में माँ दुर्गा को शक्ति का सर्वोच्च स्वरूप माना गया है। भारतवर्ष में कुल 51 शक्तिपीठ हैं, जिनमें से एक प्रमुख शक्तिपीठ चामुण्डा देवी मंदिर है। यह मंदिर मुख्य रूप से माता काली को समर्पित है, जो शक्ति और संहार की देवी मानी जाती हैं। पुराणों के अनुसार जब-जब धरती पर अधर्म और संकट बढ़ा है, तब-तब माता ने दानवों का संहार कर धर्म की रक्षा की है। असुर चण्ड और मुण्ड के वध के कारण ही माता का नाम चामुण्डा पड़ा। श्री चामुण्डा देवी मंदिर को चामुण्डा नंदिकेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की धर्मशाला तहसील में, पालमपुर शहर से लगभग 19 किलोमीटर दूर स्थित है। यह पवित्र धाम माता दुर्गा के एक दिव्य रूप श्री चामुण्डा देवी को समर्पित है। || चालीसा || ।। दोहा ।। नीलवरण मा कालिका रहती सदा प्रचंड, दस हाथो मई ससत्रा धार देती दुस्त को दांड्ड़ । मधु केटभ संहार कर करी धर्म की जीत, मेरी भी ...
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। द्वादश ज्योतिर्लिंग... हिन्दू धर्म में यह माना जाता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है। श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोंकारममलेश्वरम्॥१॥ परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमाशंकरम्। सेतुबंधे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥२॥ वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यंबकं गौतमीतटे। हिमालये तु केदारम् घुश्मेशं च शिवालये॥३॥ एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥४॥ Related Pages: श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् चिन्तामणि षट्पदी स्तोत्र गणपतितालम् श्री कालभैरव अष्टकम् अंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवानी देवी भजन- इंद्राक्षी स्तोत्रम् श्री शिव प्रातः स्मरणस्तोत्रम् 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग राम रक्षा स्तोत्र संकटमोचन हनुमानाष्टक संस्कृत में मारुति स्तो...
शिव प्रातः स्मरणस्तोत्रम् श्री शिव प्रातः स्मरणस्तोत्रम्... ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: | ॐ नमः शिवाय: शिव प्रातः स्मरण स्तोत्र : सुबह की जाने वाली, भगवान शिव की स्तुति, प्रातः स्मरण अर्थात सुबह किया जाने वाला ईश्वर का स्मरण है। ये एक छोटासा तीन श्लोकों का शिव स्तोत्र है, जो तीन श्लोकों की भगवान् शिव की स्तुति है। श्री शिव प्रातः स्मरणस्तोत्रम् ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं गंगाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् । खट्वांगशुलवरदाभयहस्तमीशं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥1॥ प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्धदेहं सर्गस्थितिप्रलयकारणमादिदेवम् । विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोSभिरामं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥2॥ प्रातर्भजामि शिवमेकमनन्तमाद्यं वेदान्तवेद्यमनघं पुरुषं महान्तम् । नामादिभेदरहितं षड्भावशून्यं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥3॥ प्रातः समुत्थाय शिवं विचिन्त्य श्लोकत्रयं येSनुदिनं पठन्ति । ते दुःखजातं बहुजन्मसंचितं हित्वा पदं यान्ति तदेव शम्भो: ॥ Related Pages: 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग रावण द्वारा रचित शिव तांडव ...
श्री लिंगाष्टकम स्तोत्र | शिव लिंगाष्टकम पाठ, अर्थ और लाभ लिंगाष्टकम् का महत्व और आध्यात्मिक लाभ... !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! लिंगाष्टकम् भगवान शिव की महिमा का वर्णन करने वाला अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है। इसमें शिवलिंग की स्तुति अत्यंत अद्भुत और सुंदर ढंग से की गई है। यह स्तोत्र शिवभक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। शिवलिंग की दिव्य महिमा: लिंगाष्टकम् में शिवलिंग को सुगंधित पुष्पों से सुशोभित, चंदन और कुमकुम के लेप से आच्छादित और विविध मालाओं से अलंकृत बताया गया है। शिवलिंग केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि सृष्टि, स्थिति और संहार के परम तत्व का प्रतीक है। यह बुद्धि में वृद्धि करने वाला, मन को पवित्र करने वाला और साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला दिव्य स्वरूप है। ॥ लिंगाष्टकम स्तोत्र ॥ ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् । जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥१॥ देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् । रावणदर...
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