नवग्रह गायत्री मंत्र: जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का दिव्य स्रोत...
हिंदू धर्म के नौ ग्रहों—सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु—को समर्पित पवित्र गायत्री मंत्र हैं। इन मंत्रों का नियमित जप से ग्रहों की शुभता बढ़ाने, मानसिक शांति प्राप्त करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है।
इन मंत्रों के जप से नौ ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है और ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है।
सूर्य गायत्री मंत्र
ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥
चंद्र गायत्री मंत्र
ॐ अमृताङ्गाय विद्महे कलारूपाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्॥
मंगल गायत्री मंत्र
ॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नः भौमः प्रचोदयात्॥
बुध गायत्री मंत्र
ॐ सौम्यरूपाय विद्महे वाणीशाय धीमहि तन्नः सौम्यः प्रचोदयात्॥
गुरु गायत्री मंत्र
ॐ अङ्गिरसाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो जीवः प्रचोदयात्॥
शुक्र गायत्री मंत्र
ॐ भृगुराजाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्॥
शनि गायत्री मंत्र
ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः शनिः प्रचोदयात्॥
राहु गायत्री मंत्र
ॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नः राहुः प्रचोदयात्॥
केतु गायत्री मंत्र
ॐ पञ्चपात्राय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्॥
नवग्रह गायत्री मंत्र जप के लाभ:
✔ ग्रह दोषों के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक।
✔ मानसिक शांति एवं आत्मविश्वास में वृद्धि।
✔ करियर, शिक्षा और व्यापार में उन्नति।
✔ स्वास्थ्य एवं पारिवारिक सुख-समृद्धि।
✔ सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक विकास।
जप विधि:
प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ संबंधित ग्रह के मंत्र का 11, 21 अथवा 108 बार जप करें।
॥ ॐ तत्सत् ॥
"सच्ची श्रद्धा, नियमित साधना और सकारात्मक कर्म—यही जीवन में वास्तविक परिवर्तन का आधार हैं।"
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